जानें कब से शुरू हो रहा खरमास, अगले 2 माह तक नहीं गूंजेगी शहनाई

 Kharmas December 2020: खरमास का समापन 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा।


खरमास 17 दिसंबर से शुरू होगा। इस बार खरमास 27 दिनों का होगा। खरमास का समापन 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा। खरमास के दौरान कोई भी नया कार्य आरंभ करना वर्जित माना गया है। इस दौरान शादी मुंडन गृह प्रवेश आदि भी बाधित रहेंगे।

रांची,प्रत्येक साल लगने वाला खरमास 17 दिसंबर से शुरू होगा। इस बार खरमास 27 दिनों का होगा। खरमास का समापन 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा। खरमास के दौरान कोई भी नया कार्य आरंभ करना वर्जित माना गया है। इस दौरान शादी, मुंडन, गृह प्रवेश आदि भी बाधित रहेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही करीब एक माह तक शुभ कार्य पर लगा ब्रेक समाप्त हो जाएगा।

13 जनवरी 2021 की रात 10.25 के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं,आज से 62 दिनों बाद 16 फरवरी माघ शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि से शहनाई फिर से गूंजेगी। विवाह का लग्न आरंभ हो जाएगा। साल 2021 का पहला शुभ लग्न 17 फरवरी को है। शादी के लिए यह बेहद शुभ मुहूर्त है। विवाह पंचमी को बसंत पंचमी भी कहा जाता है इसी दिन मां सरस्वती की भी पूजा-अर्चना होती है। पंडित वरूण मिश्रा के अनुसार खरमास में नियमित पूजा-पाठ बाधित नहीं होगा। हालांकि, कोई भी नया कार्य आरंभ करना शुभ फलदायी नहीं होगा।

मकर संक्रांति के दिन 12 बजे के बाद करें दान-पुण्य

पंडित वरूण मिश्रा के अनुसार 13 जनवरी को रात 10.25 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे जो कि अगले दिन 14 जनवरी को सुबह 9.24 मिनट तक रहेंगे। उदया तिथि होने के कारण 14 जनवरी को दिन भर मकर संक्राति मान्य होगा। ऐसे में इसी दिन मकर संक्रांति मनाया जाएगा। हालांकि, दान-पुण्य आदि के लिए दोपहर 12 बजे के बाद शुभ मुहूर्त है। भगवान को तील-चावल 12 बजे के बाद ही चढ़ाना उपयुक्त होगा।

इस दिन भूल कर भी न करें शादी

माना गया है कि जोड़ा उपर से तय होता है। जिससे शादी होनी है उसी से होगी। दूसरा जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही फल मिलेगा लेकिन ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार अगर अच्छे मुहूर्त में कार्य आरंभ किया जाए तो उत्तम फल मिलता है। यही कारण है कि आज भी बिना शुभ मुहूर्त शादी करने से लोग बचते हैं। पंडित वरूण मिश्रा के अनुसार ज्योतिश शास्त्र में कुछ तिथियों को शादी के लिए बिलकुल ही त्याज्य माना गया है। इसी दिन भूल कर भी शादी न करें। ये तिथि है चतुर्थी, नवमी और चतुदर्शी। इस तीन तिथि में शादी नहीं करनी चाहिए।