मनोज सिन्हा ने कहा-कश्मीर, जम्मू हमारी दो आँखें, किसी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

 इन नेताओं को आम लोगों को गुमराह न करने की हिदायत दी।


सिन्हा ने साक्षात्कार के दाैरान रोशनी एक्ट और भूमि कानूनों को निरस्त करने विधानसभा चुनावों की समयसीमा और 4-जी सेवाओं की बहाली के अलावा गुपकार गैंग के बाद घाटी में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंका समेत कई अहम मुद्दों पर बात की।

जम्मू,। जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की "दो आंखें" हैं। आगे बढ़ने के लिए, दोनों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना होगा। किसी एक को नजरंदाज कर दूसरे का विकास संभव नहीं है। हमें इन दोनों क्षेत्रों के विकास के लिए समान रूप से काम करना है, और यह भी हो सकता है जब दोनों एक साथ काम करेंगे। जब तक दोनों को एक साथ आगे नहीं बढ़ेंगे केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर का विकास संभव नहीं है। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने यह बात एक साक्षात्कार में कही। मुझे लगता है कि यदि प्रशासन के इरादे स्पष्ट हैं, और सरकार एक-दूसरे के पक्ष में नहीं है, तो कोई विरोध नहीं होगा।

सिन्हा ने साक्षात्कार के दाैरान रोशनी एक्ट और भूमि कानूनों को निरस्त करने, विधानसभा चुनावों की समयसीमा और 4-जी सेवाओं की बहाली के अलावा गुपकार गैंग के बाद घाटी में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंका समेत कई अहम मुद्दों पर बात की। सिन्हा ने मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं द्वारा व्यक्त की गई आशंका को दूर करते हुए कहा कि कुछ नेताओं का कहना है कि डीडीसी चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं करवाए जाएंगे। ऐसा नहीं है, डीडीसी चुनाव के बाद विधानसभा के चुनाव भी करवाए जाएंगे।उन्होंने इन नेताओं को आम लोगों को गुमराह न करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में डीडीसी हैं वहां विधानसभा चुनाव नहीं होते हैं क्या? विधानसभा, डीडीसी या फिर संसद चुनाव सब अलग-अलग होते हैं, फिर यह विरोधाभास किस बात का है। 

डरने का कोई कारण नहीं है। प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से विधानसभा चुनावों के बारे में बात की है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे संसद के पटल पर कहा। इस पर किसी को आपत्ति नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्रं मोदी ने 15 अगस्त को कहा है कि जब परिसीमन आयोग अपना काम पूरा करेगा, तब विधानसभा चुनाव होंगे। घाटी में जनसांख्यिकी परिवर्तन की आशंका पर एक सवाल के जवाब में, सिन्हा ने कहा कि विशेष रूप से कुछ भूमि कानूनों को निरस्त करने और कुछ अन्य में संशोधन के बाद यह अटकलें लगाई जाने लगी कि केंद्र की यह जनसांख्यिकी परिवर्तन की साजिश है। पर ऐसा नहीं है। मैं आपको बता दूं कि जम्मू-कश्मीर की 90 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य है। जम्मू और कश्मीर के बाहर से कोई भी कृषि भूमि नहीं खरीद सकता है। जम्मू और कश्मीर में भी केवल कृषक ही ऐसी भूमि खरीद सकते हैं। इसलिए इन बातों पर ध्यान न दें।

सिन्हा ने कहा कि कुछ कानूनों में संशोधन के कारण ऐसा कहा जा रहा है कि बाहरी लोग यूटी में जमीन खरीदने में सक्षम हो गए हैं, लेकिन काल्पनिक आशंकाओं का कोई इलाज नहीं है। मुझे यहां जमीन खरीदने वाले किसी भी बाहरी व्यक्ति का एक उदाहरण दें। 5 अगस्त 2019 से मुझे एक ही नाम बताइए। मैं किसी को भी चुनौती देता हूं कि वह बाहर से एक व्यक्ति का नाम ले, जिसने यहां जमीन खरीदी है। यह आधारहीन है।