कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में फंगल इंफेक्शन ने बढ़ाई चिंता, लोग खो रहे हैं आंखों की रोशनी
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा

डॉ. वीके पॉल ने कहा कि इस हफ्ते ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत से एक और उम्मीदवार के टीके के लिए क्लीनिकल टेस्ट के लिए मंजूरी दे दी। जेनोआ कंपनी ने भारत सरकार की अनुसंधान एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की मदद से एक वैक्सीन विकसित की है।

 नई दिल्ली, एजेंसी। देश में कोरोना वायरस की स्थिति  और वैक्सीन की इमरजेंसी अप्रूवल और उसके वितरण के तैयारी की ताजा स्थिति के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी।नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि हमें यह जानकर खुशी है कि दिल्ली ने कोरोना संक्रमण के मामले में प्रगति की है। हम दिल्ली सरकार के साथ-साथ अन्य सरकारों को भी बधाई देते हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में कोरोना संक्रमण पर रोक लगाने में योगदान देने के लिए अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई राज्य हैं, जहां हमें अभी भी चिंता है। हम उत्तराखंड, नागालैंड और हिमाचल प्रदेश के सरकार और नागरिकों से अनुरोध करते हैं कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।

डॉ. वीके पॉल ने कहा कि इस हफ्ते ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत से एक और उम्मीदवार के टीके के लिए क्लीनिकल टेस्ट के लिए मंजूरी दे दी। जेनोआ कंपनी ने भारत सरकार की अनुसंधान एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की मदद से एक वैक्सीन विकसित की है। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक फाइजर वैक्सीन जैसी ही है। इस समय देश में कुल छह वैक्सीन क्लीनिकल टेस्ट से गुजर रही हैं।दिल्ली की सीमा पर आंदोलन के लिए जमे किसानों में संक्रमण को लेकर उन्होंने कहा कि हमें सावधानी बरतनी चाहिए, सरकार से उन्हें (किसानों को) संदेश भेजे गए हैं। लोकतंत्र प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए लेकिन हमें भी कोविड के दिशा- निर्देशों का पालन करते रहना चाहिए।

गंगा राम अस्पताल में फंगल संक्रमण के कारण आंखों की रोशनी खोने वाले रोगियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह एक भयावह बीमारी है। हमें सतर्क रहने की जरूरत है। यह एक हल्की बीमारी है लेकिन कभी भी गंभीर हो सकती है।ज्ञात रहे कि कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीजों में घातक फंगल इंफेक्शन मुकोर्माइकोसिस का संक्रमण देखा जा रहा है। दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में पिछले करीब दो सप्ताह में इसके संक्रमण से पीड़ित कर 15 से 18 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इससे पीड़ित मरीजों आंख की रोशनी खराब हो गई। यहां तक कि नाक और जबड़े खराब हो गए। इससे पांच मरीजों की मौत हो गई। गंगा राम अस्पताल के डॉक्टर कहते हैं कि इस बीमारी में मृत्यु दर करीब 50 फीसद है।

शुरुआती लक्षण की पहचान जरूरी

गंगाराम अस्पताल के डॉ. मुंजाल का कहना है कि मुकोर्माइकोसिस काली फुफुंदी होती है, जो गन्ने के खेतों में पाई जाती है। वैसे यह फुफुंदी हवा में होती है, जो नाक से मस्तिष्क और आंख में प्रवेश कर जाती है, इसलिए नाक में कोई रुकावट, आंख और गाल में सूजन, आंखों के लाल होने और नाक पर काली सूखी परत दिखाई दे तो तुरंत बायोप्सी कर फंगस संक्रमण की जांच कराएं।स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि भारत में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर कोरोना के मामलों की संख्या दुनिया में सबसे कम है। भारत में प्रति मिलियन जनसंख्या 7178 मामलों की संख्या है, वैश्विक औसत 9000 है।  मंगलवार को पांच महीने में सबसे कम केस सामने आए हैं। देश में कोरोना मामलों की संख्या 94 लाख से अधिक हो गई है। एक्टिव केस लगातार घट रहे हैं और उनकी संख्या वर्तमान में 3,40,000 के लगभग है। अभी तक देश में 15 करोड़ 55 लाख से भी अधिक टेस्ट हो गए हैं। पॉजिटिविटी दर में भी गिरावट है। केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, प. बंगाल और दिल्ली में वर्तमान में अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक प्रतिदिन औसतन पॉजिटिव मामले दर्ज किए जा रहे हैं। 

कोरेाना वैक्सीन लगाने की तैयारियों को लेकर राजेश भूषण ने कहा कि 9000 कोल्ड चेन पॉइंट, 240 वॉक-इन कूलर, 70 वॉक-इन फ्रीजर, 45000 आइस-लाइनेड रेफ्रिजरेटर, 41000 डीप फ्री जर्स और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर का उपयोग किया जाएगा। ये सभी उपकरण राज्य सरकारों तक पहुंच चुके हैं। 

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाएं एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। जब हम एक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम करते हैं, जो दशकों में किया जाता है तो टीकाकरण के बाद बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुछ प्रतिकूल प्रभाव देखे जाते हैं।न्होंने कहा कि इसलिए जब कोरोना टीकाकरण शुरू होता है, तो हम किसी प्रतिकूल घटना की संभावना से इनकार नहीं कर सकते। जिन देशों में टीकाकरण पहले ही शुरू हो चुका है, विशेष रूप से ब्रिटेन में पहले दिन प्रतिकूल घटनाएं हुईं। इसलिए यह आवश्यक है कि राज्य और संघ राज्य क्षेत्र इसके लिए भी तैयारी करें।

ब्रिटेन में दो कर्मचारियों को टीका लगाने के कुछ ही देर बाद एनाफाईलैक्टॉयड रिऐक्शन यानी तीव्र रिएक्‍शन की शिकायत के बाद आई थी। हालांकि अब दोनों ही कर्मचारी इस एलर्जी से तेजी से ठीक हो रहे हैं। उसके बाद ब्रिटेन के दवा विनियामक ने पिछले दिनों कोरोना टीके के बारे में एक चेतावनी जारी की थी।

नियामक ने कहा था कि दवा, खाद्य पदार्थों या वैक्सीन से एलर्जी होने की शिकायत वाले लोग कोविड-19 वैक्सीन की खुराक नहीं लें। ब्रिटिश सरकार ने पिछले शुक्रवार को ऐलान किया था कि यदि कोरोना वैक्‍सीन से कोई साइड इफेक्‍ट होता है तो सरकार मरीज के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। हालांकि फाइजर कंपनी ने दावा किया है कि उसकी वैक्सीन कोरोना संक्रमण से 95 फीसद तक सुरक्षा देता है।