कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के लिए फंड जुटाता है मसूद, हाथरस कांड के दौरान सांप्रदायिक दंगा भड़काने की थी साजिश

 हाथरस में एक दलित युवती की हत्या के मामले ने देखते ही देखते सांप्रदायिक रूप लेना शुरू कर दिया था।

हाथरस कांड के समय वहां जाने के दौरान बीते सात अक्टूबर को मथुरा के मांट से गिरफ्तार किए गए चार आरोपितों अतिकुर्ररहमान आलम सिद्दीक व मसूद से एसटीएफ नोएडा यूनिट की पूछताछ के दौरान इसका पर्दाफाश हुआ है।

नोएडा । हाथरस कांड के दौरान सांप्रदायिक दंगा भड़काने के लिए बहराइच के रहने वाले मसूद ने फंड जुटाया था। बहराइच इन दिनों कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआइ) व पापुलर फ्रंट इंडिया (पीएफआइ) संगठन का गढ़ बन रहा है। बहराइच के युवाओं को संगठन में शामिल कर सांप्रदायिक दंगा भड़काने के लिए उकसाया जा रहा है। हाथरस कांड के समय वहां जाने के दौरान बीते सात अक्टूबर को मथुरा के मांट से गिरफ्तार किए गए चार आरोपितों अतिकुर्ररहमान, आलम, सिद्दीक व मसूद से एसटीएफ नोएडा यूनिट की पूछताछ के दौरान इसका पर्दाफाश हुआ है। एसटीएफ ने चारों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। वहीं आरोपितों से पूछताछ में सामने आए तथ्यों पर संगठन के सचिव रऊफ शरीक ने मुहर लगाई है। उसकी गिरफ्तारी रविवार को त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से हुई है। रऊफ, मसूद और अतिकुर्ररहमान के बीच बैंक खातों में करोड़ों का ट्रांजेक्शन मिला है, जिसका प्रयोग दंगा भड़काने में किया जाना था। वर्तमान में मामले की जांच यूपी एसटीएफ कर रही है।

बता दें कि हाथरस में एक दलित युवती की हत्या के मामले ने देखते ही देखते सांप्रदायिक रूप लेना शुरू कर दिया था। हाथरस में दंगा भड़काने के मकसद से दिल्ली से पीएफआइ-सीएफआइ के सदस्य अतिकुर्ररहमान, आलम, सिद्दीक व मसूद बीते सात अक्टूबर को हाथरस जा रहे थे। उनको मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की तरफ से दर्ज मुकदमे में कहा गया है कि बड़ी साजिश के तहत चारों आरोपित हाथरस जा रहे थे। उनके कब्जे से बरामद लैपटॉप व छह मोबाइल फोन में कुछ अहम जानकारी मिली है। आरोपितों के कब्जे से आइ एम नॉट इंडियन डॉटर पंफ्लेट बरामद किए गए थे जो कि सामाजिक वैमनस्यता बढ़ाने वाले एवं जन विद्रोह भड़काने वाले थे।

यह था हाथरस कांड

एक दलित युवती की हत्या की गई थी। हत्या का आरोप गांव के ही युवकों पर लगा था। मामला देश भर की सुर्खियां बना और हाथरस एसपी विक्रांत वीर सिंह समेत कई अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। मामला बढ़ता देख युवती की हत्या की जांच सीबीआइ के हवाले कर दी गई थी। वर्तमान में सीबीआइ मामले की जांच कर रही है।

जांच में मिले फर्जी कंपनियों के नाम खाता

एसटीएफ नोएडा यूनिट ने जब आरोपितों से पूछताछ की तो चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में आए। कई अलग-अलग कंपनियों के नाम पर खाते बैंक में खुलवाए गए थे। सभी कंपनियां फर्जी हंै। उनका प्रयोग दंगा भड़काने के लिए विदेश से मिलने वाली मोटी रकम के लिए किया जाता है। भारत में उन खातों का प्रयोग मसूद, अतिकुर्ररहमान व रऊफ कर रहे थे।

आरोपितों से रिमांड पर हुई पूछताछ में कुछ अहम जानकारी हाथ लगी है। पता चला है कि रऊफ व पूर्व में मथुरा में पकड़े गए संगठन के सदस्यों के बीच मोटी रकम का लेन-देन हुआ था। हर बिंदु की बारीकी से जांच की जा रही है।- अमिताभ यश, आइजी, यूपी एसटीएफ

हाई कोर्ट में सुनवाई आज

अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद के अधिवक्ता मधुवन दत्त चतुर्वेदी ने बताया कि हाई कोर्ट में पांच नवंबर को दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी। अभी तीनों की जमानत याचिका हाईकोर्ट में दाखिल नहीं की गई है। अधिवक्ता ने बताया कि चौथे आरोपित सिद्दीकी कप्पन की जमानत अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।अधिवक्ता मधुवन दत्त चतुर्वेदी ने बताया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में यह देखा जाएगा कि इनकी अभिरक्षा वैध है या अवैध है। अगर अवैध हुई तो इनको बिना जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा और वैध होने पर जमानत अर्जी दाखिल करनी होगी।