क्यों इंदिरा गांधी कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा कहती थीं, संजय गांधी के साथ जेल में रहने के लिए जज पर फेंका था कागज का गोला

 संजय गांधी के साथ जेल में रहने के लिए कमलनाथ ने कागज का गोला बनाकर जज के ऊपर फेंका था।


कमलनाथ के सिर्फ वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी राजीव गांधी और संजय गांधी के भी काफी करीबी रहे हैं। इंदिरा गांधी ने छिंदवाड़ा में आयोजित एक चुनावी सभा में कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा कहा था।

 नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क।  कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्य मंत्री कमलनाथ को गांधी परिवार को काफी करीबी माना जाता है। यही कारण है कि 2019 में मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की तो कांग्रेस नेतृत्व ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह कमल नाथ को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में  चुनाव किया। हालांकि इस कारण बाद में एमपी कांग्रेस में असंतोष सामने आया और प्रदेश सरकार गिर गई। कमलनाथ के सिर्फ वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी के भी काफी करीबी रहे हैं। इंदिरा गांधी ने छिंदवाड़ा में आयोजित एक चुनावी सभा में कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा कहा था।  यहां तक कि संजय गांधी के साथ जेल में रहने के लिए कमलनाथ ने कागज का गोला बनाकर जज के ऊपर फेंका था।     

          

13 दिसंबर 1980 को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में चुनावी सभा के दौरान मंच सजा हुआ था। इस दौरान केंद्र में जनता पार्टी सत्ता में थी और कांग्रेस पार्टी फिर से खड़ी होने की कोशिश में थी। सभा के दौरान कांग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी युवा उद्यमी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये सिर्फ कांग्रेस नेता नहीं हैं, राजीव गांधी और संजय गांधी के बाद मेरे तीसरे बेटे हैं।

नौ बार चुने गए सांसद 

दरअसल, उस दौरान पहली बार कमलनाथ चुनाव लड़ रहे थे। इंदिरा गांधी उनके लिए प्रचार करने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा पहुंची थीं। कमलनाथ उसके बाद छिंदवाड़ा से पहली बार सांसद बने, तबसे लगातार 2018 तक नौवीं बार छिंदवाड़ा से ही सांसद बनते रहे। जब तक इंदिरा गांधी जीवित रहीं, उन्हें 'मां' ही कहते रहे।  इंदिरा के बाद संजय गांधी और राजीव गांधी के साथ और उसके बाद सोनिया गांधी व राहुल गांधी विश्वासपात्र बने रहे। 

संजय गांधी और कमलनाथ की करीबी  

कमलनाथ तब दून कॉलेज में पढ़ते थे, जब उनकी दोस्ती इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी से हुई थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से ग्रेजुएशन किया। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में संजय गांधी से उनकी दोस्ती खूब मशहूर रही। आपातकाल के दौरान वे गांधी परिवार के साये के रूप में बने रहे। इस दौरान यह नारे भी लगे कि इंदिरा के दो हाथ, संजय गांधी और कमलनाथ। 14 दिसंबर, 1946 को पैदा हुए संजय गांधी का आज जन्मदिन है। कमलनाथ ने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें आज भी संजय गांधी की कमी खलती है। संजय गांधी की मौत के कई साल बाद भी कमलनाथ के ड्रॉइंग रूम में उनकी तस्वीर लगी हुई है। इसके बारे में कमलनाथ ने एक बार कहा था कि इंदिराजी मेरी प्रधानमंत्री हैं, लेकिन संजय गांधी मेरे नेता थे और हमेशा रहेंगे। उनकी मौत के 40 साल बाद भी कमलनाथ की निष्ठा में कोई कमी नहीं आई है।

संजय गांधी के लिए जेल गए कमल नाथ!

कमल नाथ के बारे में एक किस्सा मशहूर है, जब वे संजय के लिए जानबूझकर जेल चले गए। 1979 में सरकार में संजय गांधी को एक मामले में कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेज दिया। इस दौरान इंदिरा संजय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं। माना जाता है कि तब कमलनाथ जानबूझकर एक जज से लड़ गए। उनके ऊपर कागज का गोला बना कर फेंका। जज ने उन्हें इस मामले में कोर्ट की अवमानना के चलते सात दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया, जहां वे इस दौरान संजय के साथ रहे। इसके साथ ही कमलनाथ इंदिरा गांधी के और विश्वासपात्र हो गए।  

1993 में एमपी के सीएम बनते- बनते रह गए

1993 में कमलनाथ के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन ऐन मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह ने दिग्विजय सिंह का नाम आगे कर दिया और कमलनाथ सीएम बनने से रह गए। 1996 में कमलनाथ पर हवाला कांड के आरोप भी लगे थे। उसके बाद उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया। उस वक्त कांग्रेस ने उनकी पत्नी अल्का नाथ को टिकट दिया, वे छिंदवाड़ा से चुनाव जीत तो गईं लेकिन अगले साल उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1997 के उपचुनाव में कमलनाथ फिर चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के दिग्गज नेता सुंदरलाल पटवा ने उन्हें हरा दिया था। यही एक चुनाव था, जब कमलनाथ हारे थे।

केंद्र सरकार में कई बार मंत्री रहे

कमलनाथ पहली बार 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री बने। 1991 से 1994 तक वह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे। 1995 से 1996 कपड़ा मंत्री, 2004 से 2008 तक मनमोहन सिंह की सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, 2009 से 2011 तक केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री, 2012 से शहरी विकास मंत्री और 2014 तक संसदीय कार्य मंत्री रहे।