भारत में कोरोना वैक्‍सीन के डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में आने वाली चुनौतियों की हैं वाजिब वजह
कोरोना वैक्‍सीन के डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में सबसे बड़ी दिक्‍कत है कोल्‍ड स्‍टोरेज

भारत में कोरोना वैक्‍सीन के वितरण में जो चुनौतियां महसूस की जा रही हैं उनके पीछे पर्याप्‍त वजह है। सबसे बड़ी वजह इसको सुरक्षित बनाए रखने वाले कोल्‍ड स्‍टोरेज की है। पूरे देश में इस तरह के कोल्‍ड स्‍टोरेज की संख्‍या हर राज्‍य में अलग है।

नई दिल्‍ली । विशेषज्ञ अगर कोरोना वैक्सीन के वितरण को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं तो इसके पीछे पर्याप्त वजहें हैं। देश में कोल्ड चेन ढांचा समृद्ध और शहरी क्षेत्रों में अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम है। समृद्ध प्रदेश गुजरात में प्रति लाख आबादी पर औसतन चार कोल्ड स्टोर हैं, जबकि इतनी ही आबादी पर झारखंड में औसत एक का है। वैक्सीन वितरण के व्यापक आयाम का यह केवल एक पहलू है। चुनौतियों की एक लंबी फेहरिस्त है, लेकिन जिस सधी रणनीति से सरकार काम कररही है, कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं लग रहा है।

खुराक की उपलब्धता

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री कह चुके हैं कि पहले 30 करोड़ अतिसंवेदनशील लोगों की कोरोना की वैक्सीन दी जाएगी। यह काम अगस्त 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि अगले साल अगस्त तक सरकार को 60 करोड़ वैक्सीन की खुराक की व्यवस्था करनी होगी जो कि देश में कोल्ड स्टोरेज ढांचे की किल्लत को देखते हुए एक मुश्किल काम दिखता है। क्रेडिट सुईस के एक अध्ययन के अनुसार 2021 में 60 करोड़ खुराक जुटाई जा सकती है।

वैश्विक गुणवत्ता की दरकार

डब्ल्यूएचओ-यूनिसेफ का 2018 का वैश्विक स्तर पर किया गया प्रभावी वैक्सीन प्रबंधन विश्लेषण में 89 देशों की सूची में भारत को 51-75 अंक मिले हैं। नौ में से कई मानकों में भारत का प्रदर्शन बहुत खराब है।

उपरोक्त अनुमान इस तथ्य पर आधारित है कि देश में चलाए जा रहे टीकाकरण कार्यक्रमों का बुनियादी ढ़ांचा इसके चालू रहते हुए भी कोविड टीकाकरण को बढ़त दिलाएगा। साथ ही निजी कोल्ड चेन कंपनियां लक्षित खुराक की आधी हिस्सेदारी केवितरण का जिम्मा खुद उठाएंगी।

देश में वितरण नेटवर्क

भारत में वैक्सीन वितरण नेटवर्क चार सरकारी मेडिकल स्टोर डिपो (जीएमएसडी) के तहत काम करता है। ये डिपो करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में स्थित हैं। ये डिपो निर्माताओं से वैक्सीन हासिल करते हैं। करीब 53 स्टेट वैक्सीन स्टोर (एसवीएस) या तो इन डिपो से वैक्सीन की आपूर्ति हासिल करते हैं या फिर सीधे निर्माता से लेते हैं। इसके बाद स्टेट वैक्सीन स्टोरवैक्सीन को क्षेत्रीय, जिला, उप जिला स्तर के कोल्ड चेन केंद्रों को इंसुलेटेड वैन द्वारा भेजते हैं।

तीन गुना बढ़ानी होगी क्षमता

पहले चरण के कोविड टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए सरकारी क्षेत्र की क्षमता में 2-3 गुना वृद्धि करनी होगी। मौजूद सप्लाई चेन के अंतर को भरना भी बड़ी चुनौती है। साल दर साल भले ही देश का टीकाकरण प्रबंधन सुधरा हो, अब हमें इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क (ई-विन) के द्वारा रियल टाइम जानकारी मिलती है। अगस्त, 2020 में देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया जा चुका है जिसका फायदा कोविड टीकाकरण में हमें मिलेगा, लेकिन 2017-18 की स्वास्थ्य मंत्रालय की ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि बाधाएं अभी बहुत हैं। 26 फीसद ई-विन कोल्ड चेन केंद्रों पर असेसमेंट के दौरान स्टॉक खत्म था। हर पांचवें सुविधा केंद्र पर वैक्सीन की बर्बादी देखी गई।