कोरोना काल में खाएं इम्युनिटी बढ़ाने वाला तिलकुट, अश्वगंधा-मुलेठी से भरपूर
Makar Sankranti 2021: इम्युनिटी वाला तिलकुट 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
 कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार गया से रांची आकर तिलकुट बनाने वाले कुछ कारीगर इम्युनिटी बढ़ाने वाला तिलकुट तैयार करने में लगे हैं। सामान्य तिलकुट जहां 280 रुपये प्रति किलो बिक रहा है वहीं इम्युनिटी वाला तिलकुट 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

रांची,  कोरोना संक्रमण को देखते हुए लोग अपने खानपान पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इम्युनिटी बढ़ाने वाला कोई भी खाद्य पदार्थ मिल जाए, लोग उसे पसंद कर रहे हैं। जाड़े के मौसम में तिलकुट की बिक्री ज्यादा होती है। इसलिए कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार गया से रांची आकर तिलकुट बनाने वाले कुछ कारीगर इम्युनिटी बढ़ाने वाला तिलकुट तैयार करने में लगे हैं। सामान्य तिलकुट जहां 280 रुपये प्रति किलो बिक रहा है वहीं इम्युनिटी वाला तिलकुट 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

इस तिलकुट में गुड़ का भूरा, अश्वगंधा का पाउडर, मुलेठी, काली मिर्च, लौंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। रांची में पहली बार इस तरह का तिलकुट बनाया जा रहा है। तिलकुट के अलावा काले तिल के लड्डू में भी इम्युनिटी बढ़ाने वाले आइटम डाले जा रहे हैं। कारीगर व व्यवसायी रोहित बरनवाल बताते हैं कि वो दिसबंर के मध्य में अपर बाजार में करीब 20 वर्षों से तिलकुट बनाने के लिए आते हैं। इसके बाद फरवरी में वापस चले जाते हैं। इस वर्ष उन्होंने लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए आयुष मंत्रालय के द्वारा बताए गए औषधीय तत्वों का इस्तेमाल तिलकुट बनाने में किया है। जो लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।  

संतुलित मात्रा में लौंग व काली मिर्च

रोहित बताते हैं कि तिल और गुड़ शरीर के लिए वैसे भी काफी फायदेमंद हैं, लेकिन तिलकुट में मुलेठी और अश्वगंधा के इस्तेमाल से यह और अधिक फायदेमंद हो जाता है। इससे स्वाद में भी बहुत फर्क नहीं पड़ता। वहीं, लौंग और कालीमिर्च का भी संतुलित मात्रा में इस्तेमाल तिलकुट के गुणों को बढ़ा रहा। 

इम्युनिटी तिलकुट के गुण

  1. गुड़ : गुड़ शरीर कई रोगों के लिए रामबाण इलाज है। शरीर में खून की कमी को दूर करने में गुड़ काफी सहायक है। साथ ही, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। गुड़ में प्रचुर मात्रा में विटामिन ए और विटामिन बी, शुक्रोज, ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, मैग्नेशियम आदि पाया जाता है।
  2. अश्वगंधा : अश्वगंधा में एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं। ये शरीर को अंदर से मजबूत करने में मदद करता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। ये कोलेस्ट्राल, लीवर की बीमारी, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारी में काफी कारगर साबित होता है।
  3. लौंग : लौंग सांस की बीमारी खासकर कफ की दिक्कत में काफी असरदार साबित होता है। इसके अलावा ये पेट से जुड़ी कई बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है। इसमें पाए जाने वाले तत्व शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं।
  4. मुलेठी : मुलेठी कैल्शियम, एंटी-आक्सीडेंट और एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होती है। गले के लिए मुलेठी वरदान है। खांसी, मुंह के छाले और खून की कमी में मुलेठी काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटी-आक्सीडेंट रोगों से लडऩे में मदद करता है।

किसी भी आयुर्वेदिक औषधि को किसी भी तरह से सीमित मात्रा में लेने से शरीर को उसका लाभ मिलता है। तिल और गुड़ अपने आप में काफी गुणकारी औषधि है। डा भरत कुमार अग्रवाल, आयुर्वेदाचार्य।

ठंड में खाने में तिल और गुड़ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे शरीर की मांशपेशियों का बेहतर विकास होता है। हालांकि किसी भी खाद्य को सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए। डा ममता कुमारी, डाइटीशियन।