ग्वालियर-चंबल अंचल में डकैतों को खोजने के लिए बनाए गए थाने अब ढूंढ रहे हैं मवेशी
दस्युओं का नामोनिशान नहीं फिर भी टीम को मिल रहे आधुनिक हथियार व विशेष सुविधाएं

शिवपुरी ऐसा जिला है जहां लंबे समय पर डकैतों की आहट सुनाई दी तो सुस्त पड़ी एडी टीम को भी हरकत में लाया गया। यहां 15 दिन पहले कोलारस से दो चरवाहों का अपहरण हुआ दूसरे दिन ही एडी टीम ने उन्हें मुक्त करवा लिया।

ग्वालियर। डकैतों के लिए बदनाम ग्वालियर-चंबल अंचल में अब कोई गिरोह सक्रिय नहीं है। 1980-90 में दस्युओं का भय बस्तियों से लेकर बीहड़ और जंगलों तक ऐसा था कि मध्य प्रदेश सरकार को इस क्षेत्र में 20 से ज्यादा एंटी डकैत (एडी) थाने व पुलिस चौकियां बनानी पड़ीं। इनका एकमात्र काम डकैतों पर अंकुश लगाना था। बीते एक दशक से चंबल में कोई डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, फिर भी एडी थाने, चौकियों से लेकर हर जिले में एडी टीम तैनात है। हाल यह है कि अब यह टीम चोरी गए भैंस, बकरियों को ढूंढती है। एंटी डकैत टीमों को आधुनिक हथियार व अलग से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

हाल ही में ऐसा ही एक रोचक मामला सामने आया। मुरैना जिले के कहारपुरा गांव निवासी बलराम को 23 नवंबर को कुछ बदमाशों ने बांध दिया और उनकी 28 बकरियों को हांक ले गए। पहाड़गढ़ व निरार एंटी डकैत थाना के अलावा एसपी अनुराग सुजानिया ने एडी की 14 सदस्यीय टीम को बकरियां ढूंढने के काम में लगाया। टीम ने दस दिन बाद इन बकरियों को ग्वालियर जिले में तिघरा के पास ढूंढ निकाला। यह एक बानगी मात्र है। मुरैना जिले में एडी थाने पहाड़गढ़, निरार, चिन्नौनी, बागचीनी, देवगढ़ और कन्हार चौकी का स्टाफ सबसे ज्यादा भागदौड़ चोरी हुए मवेशियों के लिए करता है। ग्वालियर-चंबल संभाग के भिंड, श्योपुर, दतिया व ग्वालियर जिलों की एडी टीम व अधिकांश एडी थाने इसी तरह के छोटे-मोटे अपराधों को सुलझाने में व्यस्त हैं।

अपराध कम होने पर मिल रहा इनाम

श्योपुर जिले के चिलवानी और मगरदा में 1990 में डकैतों की गतिविधियों को देखते हुए एडी थाने बनाए गए। चूंकि दोनों थाने दूरस्थ जंगलों में है और इनके तहत छह-सात गांव ही आते हैं। इनमें सालभर में पंजीबद्ध अपराधों की संख्या 20 से 25 ही रहती है इसलिए थाने में एडी का बल मवेशियों को खोजने का काम भी कर लेता है। एएसपी पीएल कुर्वे कहते हैं कि चिलवानी और मगरदा थाने में अपराध दर बहुत कम हैं। यहां सबसे अधिक मामले मवेशी चोरी के रहते हैं। अपराध कम होने और मामले लंबित न होने पर दो दिसंबर को चंबल डीआइजी ने इन दोनों थाने के प्रभारियों को इनाम देने की भी बात कही है।

सिर्फ शिवपुरी में मूल काम कर रही एडी टीम

शिवपुरी ऐसा जिला है, जहां लंबे समय पर डकैतों की आहट सुनाई दी तो सुस्त पड़ी एडी टीम को भी हरकत में लाया गया। यहां 15 दिन पहले कोलारस से दो चरवाहों का अपहरण हुआ, दूसरे दिन ही एडी टीम ने उन्हें मुक्त करवा लिया। दो डकैतों को गिरफ्तार भी कर लिया।

मुरैना के एसपी हंसराज सिंह ने बताया कि लंबे समय से मुरैना जिले में किसी डकैत गिरोह का मूवमेंट नहीं है। एडी थाना क्षेत्रों में मवेशी चोरी की घटनाएं होती हैं तो इसी के कर्मचारी जांच व तलाशी करते हैं। इनके लिए कोई विशेष फंड नहीं आता बस एसपी विशेष हथियार व कुछ सुविधाएं देते हैं।चंबल के सेवानिवृत्त डीआइजी हरि सिंह यादव ने बताया कि चंबल में अब कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह नहीं है पर अब आबादी काफी बढ़ रही है। बल कम होने की स्थिति में एडी थानों का बल दूसरे अपराध सुलझाने में इस्तेमाल हो रहा है। इन्हें खत्म करना ठीक नहीं है।