वित्तीय संकट से जूझती राजस्थान सरकार ने खर्चों में कटौती की, बढ़ रहा है बाजार का कर्जभार

 

अशोक गहलोत सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह तीसरा बजट होगा।
सरकार ने बजट में मौजूदा वित्तीय वर्ष में राजस्व घाटा 12 345 करोड़ रुपए रहने का अनुमान रखा था जो अब बढ़कर 27607 करोड़ रुपए हो गया है। इसका प्रमुख कारण सरकार का बढ़ता कर्जभार है।

जयपुर,  संवाददाता। कोरोना महामारी के बीच राजस्थान सरकार फरवरी में प्रस्तावित विधानसभा के बजट सत्र की तैयारी में जुट गई है। अशोक गहलोत सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह तीसरा बजट होगा। वित्तीय संकट के चलते यह बजट अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण होगा। कोरोना महामारी के कारण उद्योगों की स्थिति बेहद खराब है, जिसकी सीधे चोट सरकारी खजाने पर हो रही है।

पिछला बजट पेश करते समय राज्य सरकार ने राजस्व घाटे का जो अनुमान लगाया था वह 200 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया है। सरकार के खाली होते खजाने,बढ़ते घाटे व योजनाओं के बढ़ते बोझ को देखते हुए विभिन्न विभागों से कॉस्ट इफेक्टिव प्रस्ताव मांगे गए हैं। मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि मौजूदा योजनाओं को कॉस्ट इफेक्टिव बनाने के लिए उनके पास कोई योजना है तो वह प्राथमिकता से सरकार को भेजें। सरकार ने बजट में मौजूदा वित्तीय वर्ष में राजस्व घाटा 12,345 करोड़ रुपए रहने का अनुमान रखा था जो अब बढ़कर 27,607 करोड़ रुपए हो गया है। इसका प्रमुख कारण सरकार का बढ़ता कर्जभार है।

राजस्व में कमी की पूर्ति के लिए सरकार को बाजार से उधार लेना पड़ रहा है। बजट में सरकार ने तय किया था कि वह जरूरत पड़ने पर मौजूदा वित्तीय वर्ष में 33922.78 करोड़ रुपए तक उधार लेगी। लेकिन अभी तक वित्तीय वर्ष समाप्त होने में करीब चार माह बाकी है और सरकार 33,218 करोड़ रुपए का कर्ज बाजार से ले चुकी है ।

वित्तीय संकट के हालात यह है कि सरकार के पास बजट में की गई बड़ी घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसा ही नहीं है। ऐसे में आगामी बजट में सरकार द्वारा नई घोषणाएं करना काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होगा। फिलहाल वित्त विभाग के अधिकारी इस कसरत में जुटे हैं कि वित्तीय संकट के इस दौर में विभागों की जरूरतों में कैसे और कितनी कटौती की जाए। खर्च में कमी लाने के लिए परिपत्र जारी किया गया है।सरकार को जिन विभागों से टैक्स मिलता था, वहां से भी कोई बड़ी आमदनी नहीं हो रही है। अक्टूबर, 2020 तक सरकार को टैक्स से कुल 65,877 करोड़ की आमदनी हुई है, जबकि इससे पिछले वित्तीय वर्ष की इस अवधि में 79 हजार करोड़ से अधिक का टैक्स मिल चुका था। सरकार के लिए राजस्व जुटाने वाले आबकारी, बिक्री कर, भू राजस्व,स्टांप व रजिस्ट्रेशन में भी उम्मीद के मुताबिक राजस्व नहीं मिल पा रहा है।