ये हैं दुनिया पर मंडरा रहे इस समय के 10 सबसे बड़े खतरे, WEF की रिपोर्ट

 

70 फीसद महिलाओं ने माना है कि कोरोना के कारण उनका करियर धीमा हो गया है।

लघुकालीन खतरे की बात करें तो तो 58 फीसद ने कहा कि उनको संक्रामक बीमारियों से डर लगता है। वहीं जीवन यापन पर संकट (55.1 फीसद) एक्सट्रीम वेदर इवेंट जैसे बाढ़ सूखा (52.7 फीसद) साइबर स

नई रोना ने दुनिया के हालात ही नहीं, सोचने का तरीका भी बदल दिया है। वर्तमान में लोग परमाणु बम से ज्यादा बीमारियों और आजीविका संकट को बड़ा खतरा मानते हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की नई ‘द ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2021’ में यह बात सामने आई है। इस रिपोर्ट में दुनिया पर मंडराने वाले 10 बड़े खतरों पर सर्वे और विश्लेषण किया गया है। यह सर्वे तीन श्रेणियों में किया गया है- लघुकालीन खतरा (2 साल), मध्यम काल के लिए खतरा (3 से 5 साल) और दीर्घकालीन खतरा (5 से 10 साल)।

58 फीसद को लगता है संक्रामक बीमारियों से डर

रिपोर्ट के मुताबिक, जब लोगों से लघुकालीन खतरे पर बात की गई तो 58 फीसद लोगों ने कहा कि उनको संक्रामक बीमारियों से डर लगता है। वहीं, जीवन यापन पर संकट (55.1 फीसद), एक्सट्रीम वेदर इवेंट जैसे बाढ़, सूखा (52.7 फीसद), साइबर सुरक्षा (39 फीसद) और डिजिटल असमानता (38.3) को भी लोग बड़ा संकट मानते हैं। इसके बाद लंबे समय तक नीतियों में आने वाली जड़ता को 38.3 फीसद, आतंकी हमले को 37.8 फीसद, युवाओं के मोहभंग को 36.4 फीसद, सामाजिक सामंजस्य में कमी को 35.6 फीसद और पर्यावरण के नुकसान को 35.6 फीसद लोग दुनिया के सामने आने वाली बड़ी चुनौती के रूप में देखते हैं।

मध्यम काल के लिए खतरा

एसेट बबल ब्रस्ट को 53.3 फीसद लोग, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर ब्रेकडाउन को 53.3 फीसद, मूल्य अस्थिरता को 52.9 फीसद, कमोडिटी शॉक्स को 52.7 फीसद, कर्ज को 52.3 फीसद लोग रिस्क मानते हैं। वहीं, अंतरराज्यीय संबंध खराब होना 50.7 फीसद, अंतरराज्यीय संघर्ष 49.5 फीसद, साइबर सुरक्षा की विफलता 49.0 फीसद, टेक गवर्नेंस की विफलता 48.1 फीसद और रिसोर्स जियोपॉलिटाइजेशन 47.9 फीसद लोगों की चिंता का कारण है।

विनाशकारी हथियार भी हैं दीर्घकालीन खतरा

लघु और मध्यम काल की तुलना में जब दीर्घकालीन खतरे की बात होती है तो लोगों की चिंताएं बदल जाती हैं। 62.7 फीसद लोग सामूहिक विनाश के हथियार को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। वहीं, राज्य का पतन 51.8 फीसद, जैव विविधता की हानि 51.2 फीसद, प्रतिकूल तकनीक का विकास 50.2 फीसद और प्राकृतिक संसाधन संकट 43.9 फीसद लोगों की चिंता का कारण हैं। इन सबके अलावा, सामाजिक सुरक्षा में कमी को 43.4 फीसद, बहुपक्षवाद (इन्क्लूजिविटी) में कमी को 39.8 फीसद, उद्योग के पतन को 39.7 फीसद, जलवायु परिवर्तन रोकने की कार्रवाई की विफलता को 38.3 फीसद और विज्ञान के खिलाफ गुस्सा 37.8 फीसद लोगों के लिए बड़ा संकट है।

रिपोर्ट की बड़ी बातें-

-70 फीसद महिलाओं ने माना है कि कोरोना के कारण उनका करियर धीमा हो गया है

-4 गुना डाटा जेनरेट होगा भारत में 2025 तक

-85 मिलियन नौकरियां ऑटोमेटेड हो जाएंगी

-30 फीसद युवाओं के पास तकनीक का अभाव है, जिससे वे डिजिटल की दुनिया में पिछड़ रहे हैं

-80 फीसद युवा मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं कोरोना काल में