चुटकी-चुटकी आटा इकट्ठाकर 1921 में लखनऊ में खोला चुटकी भंडार गर्ल्‍स कॉलेज

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महात्मा ने चांदी की थाली बेचकर 1925 में इसे फिर शुरू कराया।

 इतिहासकार बताते हैं कि सन 1921 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी लखनऊ आए। उनके सामने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने खाने की कमी होने की बात कही तब महात्मा गांधी ने महिलाओं से सिर्फ एक चुटकी आटा देने का आग्रह किया।

लखनऊ। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने महात्मा गांधी के लिए अपने संदेश में लिखा था कि आने वाली नस्लें मुश्किल से विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था। इसी तरह शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि चुटकी-चुटकी आटा मांगकर स्कूल भी खोला जा सकता है, लेकिन गांधीजी के आह्वान पर इस कल्पना ने आकार लिया और आज वहां तमाम बालिकाओं के सपने साकार हो रहे हैं। गांधीजी की पुण्यतिथि पर जब हम उनको स्मरण करते हैं तो चुटकी भंडार गर्ल्‍स कॉलेज के लिए किया गया उनका प्रयास आज भी अचरज सा लगता है। कहानी ही कुछ ऐसी है गांधीजी द्वारा स्थापित किए गए चुटकी भंडार गर्ल्‍स कॉलेज की।

इतिहासकार बताते हैं कि सन 1921 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी लखनऊ आए। उनके सामने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने खाने की कमी होने की बात कही, तब महात्मा गांधी ने महिलाओं से सिर्फ एक चुटकी आटा देने का आग्रह किया। आटा संग्रह के लिए जगह-जगह हांडी रखवाई गई। महिलाएं एक-एक चुटकी आटा इन हांडी में डालतीं, जिससे स्वतंत्रता सेनानियों का भोजन बनाया जाता था और जो आटा बच जाता था, उसे बेच दिया जाता था। इसी समय स्वतंत्रता सेनानी पंडित विश्वनाथ वाजपेयी ने महात्मा गांधी से बालिकाओं के लिए एक राष्ट्रीय पाठशाला खोलने की मांग की थी।

महात्मा गांधी की अपील पर लखनऊ और आसपास के शहरों की महिलाएं स्कूल बनाने के लिए सहभागिता में जुट गईं। आटा बेचकर उस समय 64 रुपये चार आने मिले थे। इसी पैसे से आठ अगस्त 1921 को चुटकी भंडार बालिका स्कूल की नींव पड़ी। पहले बैच में यहां 19 लड़कियों ने दाखिला लिया। यह स्कूल 1924 में बंद हो गया। जब महात्मा गांधी 1925 में दोबारा लखनऊ आए तो उनको स्कूल बंद होने की जानकारी मिली। लखनऊ में महात्मा गांधी को एक चांदी की थाली भेंट की गई थी, जिसे उन्होंने नीलाम कर दिया और इससे प्राप्त 101 रुपये से दोबारा स्कूल शुरू किया गया। इस स्कूल में दो कक्ष बनवाए गए। सन 1924 में नगर पालिका ने 80 फीट लंबी और आठ फीट चौड़ी जमीन स्कूल के लिए पट्टे पर दे दी।

कई दिग्गज आए थे स्कूल

1931 में चुटकी भंडार स्कूल में सरोजनी नायडू, आचार्य नरेंद्र देव और वर्ष 1936 में पंडित जवाहर लाल नेहरू और पंडित मदन मोहन मालवीय भी आए। वर्ष 1932 में पंडित विश्वनाथ वाजपेयी के प्रयासों से यह प्राइमरी स्कूल जूनियर हाईस्कूल बन गया। सन 1950 में स्कूल की नई प्रबंधन समिति गठित की गई। इस स्कूल के विकास के लिए सन 1952 में सरकार ने दो हजार रुपये दिए थे। इसके बाद 1955 में यह चुटकी भंडार हायर सेकेंड्री स्कूल बन गया। पंडित विश्वनाथ वाजपेयी के निधन के बाद सन 1952 में चंद्रभानु गुप्त इस स्कूल के संरक्षक बनाए गए थे। अब स्कूल में 48 कमरे हैं और इसे इंटर तक की मान्यता मिल चुकी है। यहां एक हजार से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं।