राजस्व बढ़ाने के लिए दक्षिणी दिल्ली निगम की रणनीति, हेल्थ और ट्रेड लाइसेंस के लिए अनिवार्य हुआ सपंत्‍तिकर

 

क्षिणी निगम का संपत्तिकर विभाग नीति बना रहा है।
निगम के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 4.50 लाख से ज्यादा संपत्तियों को यूपिक कोड जारी कर रखा है। अगर किसी लाइसेंस के समय पर संपत्ति का यूपिक कोड पहले से नहीं हैं तो उसे वेबसाइट से आनलाइन लिया जा सकता है।

नई दिल्ली। अगर आपने संपत्तिकर जमा नहीं किया है तो आने वाले दिनों में आपको हेल्थ व ट्रेड लाइसेंस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले समय में केवल उन्हीं लोगों को हेल्थ, ट्रेड व फैक्ट्री समेत अन्य लाइसेंस मिलेंगे, जिन्होंने संपत्तिकर जमा किया हुआ हो। दक्षिणी निगम का संपत्तिकर विभाग इसको लेकर नीति बना रहा है। इस नीति को निगम की मंजूरी के बाद सभी संपत्तियों का संपत्तिकर जमा करना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही निगम से संबंधित लाइसेंस लिए जा सकेंगे।

दक्षिणी निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईज आफ डूइंग बिजनेस में रैंकिंग सुधारने के साथ राजस्व बढ़ाने के लिए निगम नीति बना रहा है। इस नीति का उद्देश्य निगम के अधीन आने वाले सभी संपत्तियों की पहचान करना है। इसके लिए निगम ने संपत्तिकर जमा करने वाली प्रत्येक संपत्ति को यूनिक प्रापर्टी आइडेंटिफिकेशन कोड (यूपिक) जारी किया है।

इसके तहत व्यक्ति अपनी संपत्ति का संपत्तिकर आनलाइन या आफलाइन दोनों तरह से जमा कर सकता है। ऐसे में निगम की योजना है कि जब भी कोई व्यक्ति हेल्थ, ट्रेड और फैक्ट्री जैसे लाइसेंस के लिए आवेदन करेगा तो उसे यह यूपिक कोड भी दर्ज कराना अनिवार्य होगा। अगर, उस यूपिक कोड पर संपत्तिकर का बकाया होगा तो उस संपत्ति पर लाइसेंस जारी नहीं होगा। नागरिक पोर्टल पर जाकर तुरंत संपत्तिकर जमा कर सकते हैं। इसके बाद व्यक्ति लाइसेंस ले सकता है।उल्लेखनीय है कि फैक्ट्री, रेस्तरां, होटल व किराने की दुकान आदि काम शुरू करने के लिए निगम से फैक्ट्री, हेल्थ लाइसेंस, ट्रेड लाइसेंस और जर्नल ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। विभिन्न श्रेणियों में निगम 200 से ज्यादा कार्यो के लिए लाइसेंस प्रदान करता है।

ऐसे काम करेगा सिस्टम

निगम के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 4.50 लाख से ज्यादा संपत्तियों को यूपिक कोड जारी कर रखा है। अगर किसी लाइसेंस के समय पर संपत्ति का यूपिक कोड पहले से नहीं हैं तो उसे वेबसाइट से आनलाइन लिया जा सकता है। निगम ने पहले ही अपने पोर्टल पर इसकी सुविधा दे रखी है। ऐसे में जब भी किसी को निगम से संबंधित लाइसेंस लेना होगा तो उसी संपत्ति को लाइसेंस जारी होगा, जिसका यूपिक कोड पहले जारी किया हुआ है। यूपिक कोड की व्यवस्था उत्तरी और पूर्वी निगम में भी चल रही है।