चक्रवात से फिजी में भारी तबाही, मदद के लिए भारत ने छह टन से अधिक राहत सामग्री भेजी

 

चक्रवात यासा से फिजी में भारी तबाही। (एएफपी)
चक्रवात से प्रभावित फिजी को मदद के लिए भारत ने छह टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। इसके अलावा जल्द ही दूसरी खेप भी भेजने की तैयारी है। इससे दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों के बारे में पता चलता है।

नई दिल्ली, एजेंसियां। चक्रवात से प्रभावित फिजी को मदद के लिए भारत ने छह टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। इसके अलावा जल्द ही दूसरी खेप भी भेजने की तैयारी है। इससे दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों के बारे में पता चलता है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि चक्रवात प्रभावित लोगों के लिए भारत से राहत सामग्री की पहली खेप आज (शनिवार) फिजी पहुंच गई। 6 जनवरी तक एक और खेप पहुंचने वाली है। 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि चक्रवात यासा के मद्देनजर प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश के रूप में मित्र देशों को मानवीय सहायता और आपदा राहत सहायता सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता के तौर भारत ने राहत सामग्री भेजी है। 17 और 18 दिसंबर को फिजी में चक्रवात यासा आया था। इससे यहां बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

एक बयान में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) द्वारा कुछ ही समय में छह टन से अधिक राहत सामग्नी एकत्र की और एयर इंडिया और फिजी एयरवेज की मदद से सिडनी होते हुए फिजी पहुंचाया गया। भारत सरकार द्वारा भेजी गई राहत सामग्री में शेल्टर और हाइजिन किट शामिल हैं। इससे चक्रवात प्रभावित समुदायों को तत्काल सहायता मिलेगी।

विदेश मंत्रालय ने बयान में यह भी कहा कि फिजी में राहत सामग्री को रिकॉर्ड समय में पहुंचाने के लिए तीन देशों की एजेंसियों के बीच प्रभावी सहयोग के कारण यह संभव हुआ। मंत्रालय ने कहा कि भारत 2016 में साइक्लोन विंस्टन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण संकट और तबाही के समय फिजी के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। चक्रवात यासा के मद्देनजर अब जो राहत सामग्री भेजी गई है, वह पहली प्रतिक्रिया के रूप में मित्रवत विदेशी देशों को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) सहायता प्रदान करने की भारत की प्रतिबद्धता को दिखाती है।आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन भारत के भारत-प्रशांत महासागरों की पहल (IPOI) का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में की थी।