सुप्रीम कोर्ट ने परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए नियामक बनाने को लेकर नोटिस

 

सुप्रीम कोर्ट ने परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए नियामक बनाने को लेकर नोटिस

दावा किया गया है कि पर्यावरण मंजूरी (ईसी) की वर्तमान प्रक्रिया न तो पारदर्शी है और न ही उद्देश्यपूर्ण है। कई विशेषज्ञ निकायों ने पर्यावरण नियमन में सुधार का आह्वान किया है। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने नाटिस जारी किया।

नई दिल्ली, प्रेट्र। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से गुरुवार को उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए एक स्वायत्त और स्वतंत्र राष्ट्रीय नियामक बनाने और पर्यावरणीय शर्तो को लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने इस याचिका पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी किया।

इसमें दावा किया गया है कि पर्यावरण मंजूरी (ईसी) की वर्तमान प्रक्रिया न तो पारदर्शी है और न ही उद्देश्यपूर्ण है। कई विशेषज्ञ निकायों ने पर्यावरण नियमन में सुधार का आह्वान किया है। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल थे। यह याचिका भारतीय वन सेवा के पूर्व सदस्य एएन येलप्पा रेड्डी और सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एससी सरदेशपांडे ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2011 में केंद्र को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत एक राष्ट्रीय नियामक गठित करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।