विज्ञानियों ने एरोसोल में मौजूद वायरस को खत्म करने वाला उपकरण बनाया

 


विज्ञानियों ने एरोसोल में मौजूद वायरस को खत्म करने वाला उपकरण बनाया

विज्ञानियों को उम्मीद है कि अगर इस पर और शोध किया जाए तो एरोसोल में मौजूद वायरल कणों को निष्कि्रय करने और संक्रमण फैलाने की उनकी क्षमता को कम करने के लिए आवश्यक माइक्रोवेव ऊर्जा का पता लगाया जा सकता है।

नई दिल्ली, जेएनएन। विज्ञानियों ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो एरोसोल में मौजूद वायरस कणों को माइक्रोवेव के अंदर मार सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरीके का उपयोग करके कोरोनावायरस के प्रसार को रोका जा सकता है। कोरोना महामारी के दौरान किए गए अध्ययनों से पता चला है कि कोरोनावायरस एरोसोल के माध्यम से फैलता है। यह एरोसोल संक्रमित व्यक्ति के सांस लेने, खांसने, छींकने या बात करने से पैदा होते हैं और फैलते हैं।

बता दें कि सूक्ष्म ठोस कणों अथवा तरल बूंदों के हवा या किसी अन्य गैस में कोलाइड को एरोसोल कहा जाता है। एरोसोल प्राकृतिक या मानव जनित हो सकते हैं। हवा में उपस्थित एरोसोल को वायुमंडलीय एरोसोल कहा जाता है। धुंध, धूल, वायुमंडलीय प्रदूषक कण तथा धुआं एरोसोल के उदाहरण हैं। पूर्व में किए गए अध्ययनों से यह पता चला है कि तरल पदार्थो में वायरस को निष्कि्रय करने के लिए विद्युत चुंबकीय ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।

इसमें अमेरिका स्थित एयरफोर्स रिसर्च लेबोरेटरी भी शामिल है, जो यह कहती है कि एरोसोल में वायरस को निष्कि्रय करने के लिए माइक्रोवेव की भूमिका को समझने के लिए बहुत कम किया गया है। यह शोध फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। विज्ञानियों के अनुसार यह उपकरण विद्युत चुंबकीय आवृत्ति और ऊर्जा की अलग-अलग क्षमता प्रदान कर सकता है।

विज्ञानियों को उम्मीद है कि अगर इस पर और शोध किया जाए तो एरोसोल में मौजूद वायरल कणों को निष्कि्रय करने और संक्रमण फैलाने की उनकी क्षमता को कम करने के लिए आवश्यक माइक्रोवेव ऊर्जा का पता लगाया जा सकता है। विज्ञानियों ने यह भी कहा कि भले ही इस उपकरण को अभी प्रायोगिक तौर पर बनाया गया है, लेकिन इसके माध्यम से वायरस को निष्कि्रय करने वाले तंत्र को तैयार करने में मदद मिल सकती है।