दिल्‍ली के सीएम ने कहा- हिंसा से किसानों के मुद्दे खत्‍म नहीं हो गए, कृषि बिल किसान विरोधी

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा पर दुख प्रकट किया है।

सीएम केजरीवाल ने कहा कि किसानों पर एक के बाद एक फर्जी केस पर केस लगाए जा रहे हैं। उन्हें नहीं बल्कि जो भी लोग उसके लिए असल में जिम्मेदार हैं या जो भी पार्टी उसके लिए जिम्मेदार है उनको कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गणतंत्र दिवस पर किसानों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 26 जनवरी को जो कुछ हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण था और इसके लिए असल में जो जिम्मेदार हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे आज भी बरकरार हैं, 'आप' कार्यकर्ताओं को बिना झंडा, डंडा और टोपी के गैर राजनीतिक तरीके से किसानों का साथ देना है।

केजरीवाल आम आदमी पार्टी की नवीं राष्ट्रीय परिषद की को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसानों पर एक के बाद एक फर्जी केस पर केस लगाए जा रहे हैं। उन्हें नहीं बल्कि जो भी लोग उसके लिए असल में जिम्मेदार हैं या जो भी पार्टी उसके लिए जिम्मेदार है, उनको कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन, उस दिन हुई हिंसा की वजह से किसानों के मुद्दे खत्म नहीं हो गए, जिन मुद्दों की वजह से किसान 60 दिन से बैठे हैं। यह आंदोलन खत्म नहीं हो सकता, उनके मुद्दे खत्म नहीं हो सकते।

केजरीवाल ने कहा कि जिस देश का किसान दुखी हैं, वह देश कभी भी सुखी नहीं हो सकता। हम सब लोगों को मिलकर अपने-अपने इलाके में अहिंसक व शांतिपूर्वक किसानों का साथ देना है। केजरीवाल ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि जब भी किसानों का साथ देने जाओ, अपना झंडा, डंडा और टोपी घर पर ही छोड़कर जाना। हमें गैर राजनीतिक तरीके से अपना काम करना है। इस देश का आम नागरिक बन करके जाना है, वहां पर कोई राजनीति नहीं करनी है।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि आजकल हमारे देश का किसान बहुत दुखी है। 70 साल से सभी पार्टियों ने मिलकर किसानों को धोखा दिया। कभी कहते थे कि तुम्हारा लोन माफ करेंगे, किसी ने लोन माफ नहीं किया। कभी कहते थे, तुम्हारे बच्चों को नौकरी देंगे, किसी ने नौकरी नहीं दी। बताया जा रहा हैं? कि देश के अंदर पिछले 25 साल में 3.5 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

किसी ने किसानों की सुध नहीं ली। अभी जो ये तीनों बिल आए हैं, यह तीनों बिल एक तरह से किसानों से उनकी खेती छीनकर इन 2-4 पूंजीपतियों को सौंप देंगे। अब किसान के लिए अस्तित्व का सवाल हो गया है। अब किसान सड़क पर नहीं उतरेगा, तो किसानी ही नहीं बचेगी और किसानी नहीं बचेगी, तो बेचारा किसान कहां जाएगा, वो अपने परिवार को कैसे पालेगा। मैं कई बार सोचता हूं कि इतनी ठंड के अंदर किसान कैसे बैठे हैं? वो इसीलिए बैठे हैं, क्योंकि अगर वे नहीं बैठेंगे, तो उनका कुछ बचेगा ही नहीं।