मार्च से जून के बीच दुनिया के 145 देशों को डब्‍ल्‍यूएचओ मुहैया करवाएगा कोरोना वैक्‍सीन

 

145 देशों की करीब 3.3 फीसद आबादी को वैक्‍सीन मुहैया करवाकर सुरक्षा दी जाएगी।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन मार्च से जून के बीच में विश्‍व के 145 देशों को कोवैक्‍स वैक्‍सीन मुहैया करानी शुरू कर देगा। संगठन की इस कोशिश के जरिए इन देशों की 3.3 फीसद आबादी को सुरक्षा दी जा सकेगी।

न्‍यूयॉक (यूएन)। एक वर्ष से अधिक समय से कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के गरीब देशों के लिए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन न्‍यायसंगत तरीके से कोवैक्‍स वैक्‍सीन को उपलब्‍ध कराएगा। डब्‍ल्‍यूएचओ ने एक घोषणा करते हुए कहा है कि विश्‍व के करीब 145 देशों में ये पहल की जाएगी। संगठन द्वारा चुने गए देशों में अधिकतर ऐसे देश हैं जो गरीब हैं और जहां की सरकारें और लोग इसका खर्च खुद वहन नहीं कर सकते हैं। ऐसे देशों में मानवता को बचाने के लिए संगठन की तरफ से ये एक बड़ी कोशिश है। संगठन की तरफ से ये भी कहा गया है कि जुलाई 2021 तक कोवैक्‍स को इन देशों में मुहैया करवाने का काम शुरू हो जाएगा।

संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्‍वास्‍थ्‍य एजेंसी के मुताबिक ये तय किया जाएगा कि इसका वितरण बिना भेदभाव और तेजी से किया जा सके। संयुक्‍त राष्‍ट्र का मानना है कि जून तक कोवैक्‍स वैक्‍सीन की आपूर्ति सुनिश्चित हो जाएगी। आपको बता दें कि विश्‍व में महामारियों की रोकथाम के लिए चलाए जाने वाले टीकाकरण में यूनीसेफ या संयुक्त राष्ट्र बाल कोष एक बड़ी भूमिका अदा करता रहा है। यूनीसेफ ने डब्‍ल्‍यूएचओ की इस घोषणा का स्‍वगत किया है।

यूनीसेफ की तरफ से कहा गया है कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि वैक्‍सीन की खरीद इतने बड़े पैमाने पर हो रही है और इस बार टीकाकरण प्रोग्राम पहले चलाए गए सभी टीकाकरण से कहीं अधिक बड़ा है। संगठन की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा का कहना है कि अब बस इसको सही तरीके से करना होगा, जो एक बड़ी जिम्‍मेदारी है। संगठन इसके लिए स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को वैक्‍सीन की रखरखाव का पूरा प्रशिक्षण भी देगा। शहरी इलाकों में जहां पर इसका ज्‍यादा असर देखा जा रहा है वहां पर खुराकों की बड़ी खेप स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के ऊपर इस्‍तेमाल की जाएगी।

आपको बता दें कि फाइजर और बायोएनटेक की वैक्‍सीन को बेहद ठंडे तापमान में रखने की जरूरत होती है। इन वैक्‍सीन को संगठन 18 देशों में मार्च तक उपलब्‍ध करवा देगा। इसके अलावा ऑक्‍सफॉर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्‍सीन की करीब 33 करोड़ खुराक कोवैक्‍स की पहल वाले देशों में भेजी जाएंगी। इनके लिए अभी डब्‍ल्‍यूएचओ की मंजूरी मिलना बाकी है।

इन खुराकों के जरिए 145 देशों में करीब 3.3 फीसद आबादी को इस महामारी से सुरक्षा दी जाएगी। इससे सरकारों को भी उन लोगों को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी जो इस महामारी की रोकथाम में सबसे आगे खड़े होकर अपनी जिम्‍मेदारी निभा रहे हैं। यूनीसेफ प्रमुख पहले ही इस बात को कह चुकी हैं कि संगठन कोरोना वायरस की करीब 50 करोड़ सिरींज के स्‍टोरेज में लगी हुई है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे इस कार्यक्रम पर किसी तरह की कोई रुकावट न आ सके।क समझौते के तहत यूनीसेफ 100 देशों के लिये कोरोना की वैक्‍सीन की एक अरब दस करोड़ खुराक का इंतजाम कर लिया है। इसमें भारत के सीरम इंस्टिट्यूट का बड़ा योगदान है। इसके अलावा ऑक्‍सफॉर्ड और एस्‍ट्राजेनेका और नोवावैक्स वैक्सीन के लिये किया गया है। हेनरीएटा के मुताबिक इस कार्यक्रम के लिए ये देश हर खुराक के लिए तीन डॉलर की रकम चुकाएंगे।