कोलकाता में पिछले 35 वर्षों में पांच हजार से अधिक जलाशय हुए 'गायब'

 

कोलकाता में पांच हजार से अधिक जलाशय गायब हुए हैं।

तीन दशक पहले जलाशयों की कुल संख्या 8731 थी जो वर्तमान मे साढ़े तीन हजार के करीब है। पर्यावरणविद् ने कहा कि पाटे गए कई जलाशयों को पूर्व स्थिति में लाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से आदेश दिया गया है लेकिन सरकार इस बाबत कोई कदम नहीं उठाया।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। कोलकाता में पिछले 35 वर्षों के दौरान पांच हजार से अधिक जलाशय 'गायब' हुए हैं। 15 साल पहले केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत 'द नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग आर्गानाइजेशन' की ओर से कोलकाता के जलाशयों पर एक रिपोर्ट जारी की गई थी। वह रिपोर्ट उस समय से 20 साल पहले एकत्रित जानकारी पर आधारित थी, यानी उस रिपोर्ट के मुताबिक 35 साल पहले कोलकाता में जलाशयों की कुल संख्या 8,731 थी जबकि कोलकाता नगर निगम की जानकारी के मुताबिक वर्तमान में महानगर में करीब साढ़े तीन हजार जलाशय हैं। यानी इन 35 वर्षों में 5231 जलाशय महानगर के मानचित्र से पूरी तरह गायब हो चुके हैं। हर साल किसी न किसी तरह से लगभग 150 जलाशयों को पाटा गया है।

जलाशयों को पाटे जाने की शिकायत मिलते ही हो रही कार्रवाई : पर्यावरण मंत्री

राज्य के पर्यावरण मंत्री सौमेन महापात्र ने कहा कि जलाशयों को पाटे जाने की शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जा रही है। इसमें किसी तरह का समझौता नहीं किया जा रहा। दूसरी तरफ पर्यावरणविद् सुभाष दत्त ने कहा कि पाटे गए कई जलाशयों को पूर्व स्थिति में लाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से आदेश दिया गया है लेकिन सरकार की तरफ से अब तक इस बाबत कोई कदम नहीं उठाया गया है।

इस बाबत कोलकाता नगर निगम की प्रशासक मंडली के सदस्य स्वपन समाद्दार से पूछने पर उन्होंने पलड़ा झाड़ते हुए कहा-'अतीत में क्या हुआ, यह मैं नहीं बता सकता। कोलकाता में आगे से और जलाशयों को गैरकानूनी तरीके से पाटा न जा सके, इस बाबत निगम की ओर से उपयुक्त कदम उठाए जा रहे हैं।' गौरतलब है कि जलाशयों के संरक्षण के लिए निगम की ओर से डेढ़ साल पहले अधिसूचना जारी कर 'वाटरबॉडी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' शुरू करने की बात कही गई थी। इसके तहत कोलकाता के प्रत्येक जलाशय को 'यूनिक आइडी नंबर' देने और उनपर ड्रोन से नजरदारी रखने की भी बात कही गई थी लेकिन अब तक उसे अमली जामा नहीं पहनाया गया है।