पुराने टायरों में ढूंढी कलात्मकता और खड़ा हो गया खूबसूरत फर्नीचरों का व्यापार, पढ़ें धनबाद के इंजीनियरों का कमाल

 

धनबाद के इंजीनियरों द्वारा टायर से बनाया गया फर्नीचर। जागरण

पीएम नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल मुहिम को धनबाद का सिविल इंजीनियर धार दे रहा है। महज एक हजार रुपये से कारोबार शुरू किया। पर्यावरण संरक्षण का मकसद भी पूरा हो रहा है। हर माह अच्‍छी आमदनी के साथ चार युवाओं को भी रोजगार दिया।

धनबाद, [आशीष सिंह]। धनबाद के बैंक मोड़ निवासी सिविल इंजीनियर रोशन कोरोना वायरस संक्रमण काल और लॉकडाउन के बाद कई महीने से घर पर ही हैं। इस दौरान उन्होंने समय का सदुपयोग करते हुए कुछ अलग करने की सोची। अपने आसपास नजर दौड़ाई तो उन्हें आइडिया भी मिल गया और देखते ही देखते आइडिया हिट भी हो गया। अब रोशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्‍मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल मुहिम को धार दे रहे हैं। रोशन ने इधर-उधर बेकार पड़े और फेंके हुए टायरों से खूबसूरत फर्नीचर बनाने का काम शुरू किया है।

टायरों से बने ये फर्नीचर यूनिक भी हैं और सस्ते भी। इसकी डिमांड भी है। कई होटल और रेस्त्रां में भी परिसर को अलग लुक देने के मकसद से लोग इन फर्नीचर को लगा रहे हैं। इतना ही नहीं पर्यावरण के लिए खतरनाक पुराने टायरों को रोशन ने इसी बहाने बहुत उपयोगी भी बना दिया है। ये फर्नीचर बाजार में तेजी से जगह बना रहे हैं। रोशन ने बताया कि उन्होंने आसनसोल से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है।

निश्‍चय किया था कि नौकरी की जगह कारोबार करूंगा, ताकि दूसरों को नौकरी दे सकूं, लेकिन ज्यादा पूंजी नहीं थी। लॉकडाउन में घर पर ही था। तब आसपास पड़े पुराने टायरों काे देखकर सोचा कि इनका सदुपयोग कैसे हो। इनको अक्‍सर लोग जला देते हैं। इससे प्रदूषण भी फैलता है। मन में विचार आया कि इनसे चेयर और टी-टेबल बन सकते हैं।                

इसी दिशा में काम आगे बढ़ाया और महज एक हजार रुपये से इसका व्यवसाय शुरू किया। कबाड़ी पट्टी और झरिया बाजार से पुराने टायर खरीदे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई काम आई और देखते ही देखते स्टार्टअप खड़ा हो गया। अपने साथ चार अन्य युवाओं को भी प्रशिक्षण देकर फर्नीचर बनाना सिखाया है। हर माह 30 से 40 टी-टेबल व कुर्सियों के सेट बिक जाते हैं। अभी शुरुआत है फि‍र भी हमें करीब 20 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है, जो वक्‍त के साथ काफी बढ़ेगी, ऐसी उम्मीद है।

सोशल मीडिया का लिया सहारा

रोशन बताते हैं कि अपने काम में शर्म कैसी, मेहनत से सफलता मिलती है। हम बाजार में पैदल ही निकल जाते थे। अपने उत्‍पाद को लोगों को दिखाकर उसकी उपयोगिता बताने लगे। हमारे बनाए फर्नीचर बाजार में अन्‍य के मुकाबले सस्‍ते हैं। सामान्‍य फर्नीचर ऑनलाइन मंगाने पर चार हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। हमारा सेट मात्र 1000 से 1500 रुपये में उपलब्‍ध हो जाता है। हमारी कोशिश है कि फर्नीचर को रंग-रोगन कर इतना खूबसूरत बनाएं कि समाज के हर वर्ग को भा जाए। रोशन ने बताया कि यह रोजगार खड़ा करने के लिए युवाओं को निःश्शुल्क प्रशिक्षण भी देते हैं। रोशन के पिता अनूप रवानी इंडियन ऑयल में बोकारो में कार्यरत हैं। वे भी बेटे का उत्‍साह बढ़ाते हैं। बकौल रोशन बाजार में भ्रमण के दौरान जगह-जगह अपना वाट्सएप नंबर दिया। इससे फर्नीचर की मांग बढ़ी है।

होटलों से भी मिलने लगे ऑर्डर

रोशन बताते हैं कि अब वाट्सएप पर भी ऑर्डर मिलने लगे हैं। बैंक मोड़ के एक नामचीन होटल से 20 चेयर का ऑर्डर मिला है। फर्नीचर की बिक्री से होने वाली आमदनी का 35 फीसद अपनी टीम के युवाओं को देते हैं। काम शुरू किया है। इसे लोग पसंद कर रहे हैं। कोई निवेशक का साथ मिल जाए तो बड़े स्तर पर यह काम करेंगे। यह व्यवसाय आगे और बढ़ेगा, इसका भरोसा है।