आसमान चूमने वाले पक्षियों को नहीं है आपके खिड़कियों की आदत, पढ़िए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट


पक्षी शीशे पर हमला करते हैं, कांच पर चोंच से वार करते हैं जिससे उन्हें चोट लगती है।
Publish Date:Fri, 12 Feb 2021 05:32 PM (IST)Author: Prateek Kumar

छत पर बागवानी (रुफ गार्डनिंग) करने में लिमका बुक ऑफ रिकार्ड में दस से अधिक बार नाम दर्ज कराने वाले पर्यावरणविद मदन गोपाल कोहली ने बताया कि उन्होंने कई बार चिड़ियों को खिड़कियों से सिर टकराते देखा है। उस दौरान उन्हें घायल और मरते हुए भी देखा है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। आइने में खुद को निहारते हुए हम घंटों समय बिता सकते हैं, लेकिन पक्षियों के साथ ऐसा नहीं है। पक्षी अपने प्रतिबिंब को देखकर न केवल भयभीत हो जाते हैं, बल्कि उससे लड़ते हुए स्वयं को भी नुकसान पहुंचा लेते हैं। शहरी क्षेत्रों में मकानों के बदलते हुए डिजाइन में अक्सर कांच व उससे मिलते जुलते सामान का प्रयोग होता है। इन खिड़कियों के पास आने वाले पक्षी भ्रमित हो जाते हैं और अपने प्रतिबिंब को दुश्मन समझ बैठते हैं। उनपर हमला करते हैं, कांच पर चोंच से वार करते हैं जिससे उन्हें चोट लगती है।

ऊंचाई वाले जगह पर बनाते हैं घोंसला

जब घोंसले बनाने का मौसम आता है तब पक्षी अक्सर ऐसी ऊंचाई वाले स्थान का चुनाव करते हैं, लेकिन खिड़कियों में लगा कांच उन्हें भ्रमित करता है। इस वजह से पक्षी खुद को घायल करते हैं या कई बार मर भी जाते हैं। यह चिंताजनक बात है।

पक्षियों के लिए अधिक खतरनाक

यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के प्रभारी विज्ञानी फैयाज ए खुदसर इस बारे में कहते है कि कई पक्षी खिड़कियों में दिखने वाले प्रतिबिंबों को शत्रु पक्षी के रूप में देखते हैं। उन्होंने पक्षियों को खिड़की पर स्वयं के प्रतिबिंब को देखते हुए देखा है। हालांकि, साधारण कांच के मुकाबले प्रतिबिंब वाले (रिफ्लेक्टिव विंडो) और ग्लास फिल्मों की खिड़कियां पक्षियों के अधिक खतरनाक हैं। विशेषकर एवियन (गैर शहरी) प्रजातियों के पक्षियों के लिए यह अधिक खतरनाक हैं।

पक्षियों की परेशानी को समझें लोग

छत पर बागवानी (रुफ गार्डनिंग) करने में लिमका बुक ऑफ रिकार्ड में दस से अधिक बार नाम दर्ज कराने वाले पर्यावरणविद मदन गोपाल कोहली ने बताया कि उन्होंने कई बार चिड़ियों को खिड़कियों से सिर टकराते देखा है। उस दौरान उन्हें घायल और मरते हुए भी देखा है। उन्होंने देखा है कि किस प्रकार एक बार जब पक्षी खिड़की से कमरे के भीतर प्रवेश करता है तो बाहर निकलने का रास्ता नजर नहीं आता, क्योंकि वह शीशे के प्रतिबिंब और सूर्य की किरणों के रिफलेक्शन की वजह से फंसकर रह जाता है।

बार बार चोट करने से घायल होता है और कभी मर जाता है। उन्होंने बताया कि आधुनिकता के इस दौर में लोग यह भूल रहे हैं प्रकृति से भी नाता है। लोगों को समझना होगा कि अपनी सुविधाओं के लिए पक्षियों की जान दांव पर न लगाएं। उनकी परेशानी को समझें। मदन गोपाल प्रतिदिन छत पर पक्षियों को दाना डालते हैं। वह कहते हैं जो पक्षी शहरी क्षेत्र में रहते हैं उन्हें भी अब तक खिड़कियों में लगे कांच की आदत नहीं हुई हैं।