अस्थमा मरीजों को कोरोना से मरने का खतरा नहीं, करीब छह लाख लोगों पर हुए शोध में आया सामने

 

शोध में शामिल साढ़े तीन लाख लोग कोरोना पॉजिटिव

अध्ययन में शामिल 350000 लोग कोरोना से संक्रमित थे और ये मरीज एशिया यूरोप उत्तरी और दक्षिण अमेरिका के थे। परिणामों से पता चला कि प्रत्येक 100 कोरोना मरीजों में सात को अस्थमा था। वहीं 100 सामान्य लोगों में आठ को अस्थमा था।

नई दिल्ली, आइएएनएस। एक नए अध्ययन से पता चला है कि अगर कोई व्यक्ति अस्थमा का मरीज है तो उसके कोरोना से ग्रसित होने और महामारी से मरने का खतरा नहीं होता है। 5,87,000 लोगों पर किए गए शोध से जानकारी मिली है कि अस्थमा से पीड़ित लोगों में कोरोना होने का जोखिम ना केवल 14 फीसद कम होता है बल्कि ऐसे लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत भी कम पड़ती है।

ऑस्ट्रेलिया स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स से ताल्लुक रखने वाले और शोध के प्रमुख लेखक एंथोनी सुजाय ने कहा, 'अस्थमा मरीजों के मुकाबले गैर अस्थमा मरीजों के कोरोना से ग्रसित होने का खतरा ज्यादा होता है। यह जानने के लिए और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है कि अस्थमा मरीजों पर वायरस का प्रभाव कैसे होता है।' यह शोध पियर रिव्यूड जर्नल ऑफ अस्थमा में प्रकाशित हुआ है और इस दौरान 57 अध्ययनों के 5,87,280 लोगों के आंकड़ें जुटाए गए।

अध्ययन में शामिल 3,50,000 लोग कोरोना से संक्रमित थे और ये मरीज एशिया, यूरोप, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका के थे। परिणामों से पता चला कि प्रत्येक 100 कोरोना मरीजों में सात को अस्थमा था। वहीं 100 सामान्य लोगों में आठ को अस्थमा था। पूर्व में किए गए शोध से इस बात का पता चला था कि अगर किसी को अस्थमा है तो वायरस का उस पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसमें कहा गया था कि कोरोना के कारण होने वाले श्वसन संक्रमण से अस्थमा की दिक्कत बढ़ती है। हालांकि हाल ही में किए गए अध्ययन से यह बात सच साबित नहीं हुई कि अगर किसी को अस्थमा है तो उसके कोरोना से मरने का खतरा बढ़ जाता है।