राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत लगेगी फैटी लिवर डिजीज पर लगाम, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जारी की ऑपरेशनल गाइडलाइन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन की फाइल फोटो

केंद्रीय मंत्री के हवाले से स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा पिछले दो दशक में एनएएसएच (नॉन अल्कोहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस) के मामले वैश्विक स्तर पर दोगुना हो गए हैं। एनएएफएलडी भारत में लिवर से जुड़ी बीमारियों का बड़ा कारण बनती जा रही है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज पर नियंत्रण की जरूरत को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इसे कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों के रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCDCS) से जोड़ने की ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी की है। एनएएफएलडी में मरीज के लिवर में असामान्य तरीके से वसा जमा होने लगती है। ऐसे मरीजों में शराब का सेवन या वायरल हेपेटाइटिस जैसा कोई अन्य कारक न होते हुए भी लिवर में वसा जमा होने लगती है।

केंद्रीय मंत्री के हवाले से स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, 'पिछले दो दशक में एनएएसएच (नॉन अल्कोहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस) के मामले वैश्विक स्तर पर दोगुना हो गए हैं। एनएएफएलडी भारत में लिवर से जुड़ी बीमारियों का बड़ा कारण बनती जा रही है।' एनएएफएलडी इसीलिए बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि यह सामान्य नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर से लेकर एनएएसएच, सिरोसिस और लिवर कैंसर तक का कारण बन सकती है। देश में गैर संचारी रोगों के कारण पड़ने वाले दबाव से निपटने की दिशा में एनएएफएलडी के नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में आम आबादी में एनएएफएलडी की नौ से 32 फीसद तक आशंका है। मोटापे और डायबिटिक या प्री-डायबिटिक लोगों में यह आशंका ज्यादा है। शोध में टाइप-2 डायबिटीज वालों में 40 से 80 फीसद और मोटापाग्रस्त लोगों में 30 से 90 फीसद तक एनएएफएलडी के मामले देखे गए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनएएफएलडी अपने आप में दिल की बीमारियों, टाइप-2 डायबिटीज और कई अन्य मेटाबोलिक सिंड्रोम का संकेतक है। सरकार का मानना है कि गैर संचारी रोगों पर राष्ट्रीय कार्यक्रम को आसानी से एनएएफएलडी के रोकथाम से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत पहला देश है जिसने एनएएफएलडी के खिलाफ कदम उठाने की जरूरत को अनुभव किया है। भारत सरकार ने इस बात को माना है कि गैर संचारी रोगों से जुड़ी रणनीतियों को एनएएलएफडी के रोकथाम की दिशा में मोड़कर इससे निपटा जा सकता है। आदतों और जीवनचर्या में बदलाव जैसे कदम इसमें सहायक हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत - हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से गैर संचारी रोगों से निपटने में बहुत मदद मिली है।