आने वाले समय में दूसरी लहर की कोई आशंका नहीं, बरततें रहें एहतियात

 

मानसून आने तक हम टीकाकरण और अर्जति इम्युनिटी से हर्ड इम्युनिटी प्राप्त कर चुके होंगे।

 मेरा मानना है कि मानसून आने तक हम टीकाकरण और अर्जति इम्युनिटी से हर्ड इम्युनिटी प्राप्त कर चुके होंगे। आने वाले समय में दूसरी लहर की कोई आशंका नहीं। यदि आती भी है तो इसका प्रभाव बहुत मामूली होगा।

 केरल में इसलिए मामले बढ़ रहे हैं क्योंकि वहां लोग अति जागरूक हैं। अत्यधिक सावधानी के कारण रोजाना भाग-दौड़ करने वालों में अब तक हर्ड इम्युनिटी नहीं बन सकी है। जब तक लाकडाउन था, सब ठीक रहा। जनजीवन जैसे ही सामान्य हुआ, संक्रमण फिर से फैलने लगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) surveillance की हालिया रिपोर्ट को देखें तो अन्य राज्यों के मुकाबले केरल में कम इम्युनिटी पाई गई है। फिर भी केरल में कोरोना मृत्युदर भारत की औसत दर से चार गुना कम है और यह राहत की बात है।

बीते पांच हफ्तों से ग्लोबल कोरोना वायरस के केस की दर भी तेजी से घटी है। कई देशों में टीकाकरण युद्धस्तर पर जारी है, मगर संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अब भी 130 देशो में वैक्सीन नहीं पहुंच सकी है। इससे लगता है कि वायरस के साथ दुनिया का संघर्ष अभी थोड़ा और चलेगा। इस देरी के कारण जब तक वैक्सीन दुनिया के हर हिस्से तक पहुंचेगी, कोरोना वायरस एंडेमिक (ऐसी महामारी जिसके संक्रमण का अंत होता न दिख रहा हो) हो जाएगा। इसका मतलब वायरस आने वाले समय में वैश्विक आबादी के बीच घूमता रहेगा और कोविड मुक्त जगहों पर संक्रमण फैलाता रहेगा। जाहिर है कि जरूरत संपूर्ण विश्व में एकसमान टीकाकरण की है। सामान्य फ्लू वायरस भी एंडेमिक है, लेकिन हम इसके संक्रमण, बीमारियों व इससे होने वाली मौतों को प्रति वर्ष अपडेटेड टीकों और अपनी इम्युनिटी के संयोजन से नियंत्रित कर लेते हैं, वह भी बिना किसी लाकडाउन, शारीरिक दूरी और मास्क के। इस मानसिकता के साथ टीकाकरण पूरा किया जाए तो ही कोरोना के प्रकोप पर पूरी तरह काबू पाया जा सकेगा।

इसके बावजूद यह मानकर चलना है कि समय के साथ वायरस के नए-नए प्रतिरूप आते रहेंगे और हमें इसके म्यूटेशन को समझकर वैक्सीन में बदलाव करने पड़ सकते हैं। अभी तक ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीकी प्रतिरूप की पहचान हुई है। इनके कुछ मामले भारत में भी मिले हैं। दक्षिण अफ्रीकी प्रतिरूप 501.वी2 के बारे में कहा जा रहा है कि वैक्सीन इस पर काफी हद तक असरदार है। वायरस के विभिन्न प्रतिरूपों से प्रभावी बचाव के लिए हमें एक विश्वव्यापी वायरस सíवलांस की जरूरत होगी, जो इसके विभिन्न स्ट्रेंस की जानकारी देते रहें ताकि समय रहते वैक्सीन अपडेट की जा सके।भारत के कई महामारी विज्ञानी आगामी मानसून सीजन की शुरुआत को संवेदनशील समय बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि मानसून खत्म होने के बाद ही सही मायने में भारत में हालात का आकलन किया जा सकेगा। इसके उलट मेरा मानना है कि मानसून आने तक हम टीकाकरण और अर्जति इम्युनिटी से हर्ड इम्युनिटी प्राप्त कर चुके होंगे। आने वाले समय में दूसरी लहर की कोई आशंका नहीं और यदि आती भी है तो इसका प्रभाव बहुत मामूली होगा। बस एहतियात बरततें रहें और सतर्क रहें।