राकेश टिकैत बोले जब तक कृषि कानून वापसी नहीं तब तक किसानों की घर वापसी नहीं

 

भाकियू नेता राकेश टिकैत बोले जब तक सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती है हमारी घर वापसी नहीं होगी।

भाकियू नेता राकेश टिकैत बोले जब तक सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती है तब तक हमारी घर वापसी नहीं होगी। मंच और पंच वही रहेंगे। मुख्यालय सिंघु बॉर्डर ही है केंद्र चाहे तो हमसे आज बात कर सकता है या दस दिनों के बाद भी बात कर सकता है।

नई दिल्ली, एएनआइ। भारतीय किसान यूनियन के नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत बोले जब तक सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती है तब तक हमारी घर वापसी नहीं होगी। इसके लिए मंच और पंच वही रहेंगे। हमारा मुख्यालय सिंघु बॉर्डर ही है, केंद्र चाहे तो हमसे आज बात कर सकता है या दस दिनों के बाद भी बात कर सकता है। यदि इतने दिनों में भी बात करने का राजीनामा नहीं बनता है तो वो अगले साल तक हमसे बात कर सकता है, हम इसके लिए भी तैयार हैं। हम दिल्ली पर लगे बैरिकेड को हटाए बिना नहीं जाएंगे।

उन्होंने कहा कि किसान दिल्ली की सीमा पर बीते 79 दिन से धरना देकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार से कई दौर की बातचीत के बाद भी अब तक इसका हल नहीं निकल पाया है। उधर 26 जनवरी के उपद्रव के बाद से कई किसान संगठनों ने इससे अपने को अलग कर लिया है।

राकेश टिकैत किसानों का समर्थन हासिल करने के लिए आसपास के जिलों में महापंचायत कर रहे हैं और समर्थन मांग रहे हैं। नोएडा के इंट्री गेट दलित प्रेरणा स्थल पर चल रहा धरना खत्म कर दिया गया। 26 जनवरी के बाद से किसानों के आंदोलन में बड़े पैमाने पर परिवर्तन भी देखने को मिला। नेताओं ने संसद तक पैदल मार्च आदि का ऐलान कर रखा था, मगर वो सब वापस ले लिए गए।

अब शुक्रवार को राकेश टिकैत ने एक बार फिर ऐलान किया कि जब तक सरकार कानून वापसी नहीं करती है तब तक धरना दे रहे किसानों की घर वापसी नहीं होगी। कानून रद्द होने के बाद ही घर वापसी होगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि हमारा मंच और पंच अभी भी सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान ही है, यूपी गेट पर चल रहा धरना समर्थन में चल रहा है मगर मुख्यालय सिंघु बॉर्डर ही था और रहेगा।

इस बीच संसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि सरकार ने कानून थोपा नहीं है बल्कि किसानों को विकल्प दिया है। यदि वो चाहे तो इसको अपना सकते हैं और नहीं चाहते तो इसे लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कानून में कोई गड़बड़ी हो तो किसान सरकार को उसे बता सकते हैं वो उसे ठीक कर देगी। सारे कानून और उसमें संशोधन भलाई के लिए ही किए जाते हैं किसी को नुकसान पहुंचे इसके लिए नहीं। किसानों को सरकार से बातचीत करके समस्या का समाधान करवाना चाहिए।