साहब, बीवी के जेवर गिरवी रखे, अब इंसाफ चाहिए, दास्तांं सुनकर भर आएंगी आंखें

300 Bed Hospital Scam : साहब, बीवी के जेवर गिरवी रखे, अब इंसाफ चाहिए, दास्तांं सुनकर भर आएंगी आंखें

साहब बीवी के जेवर गिरवी रखकर पैसा दिया था कि नौकरी लग जाएगी तो घर की परिस्थितियां बदल जाएंंगी। अव्वल नौकरी तो लगी नहीं लेकिन ठगों को पैसा देने के बाद घर की परिस्थितियां जरूर बदल गईंं।

बरेली,  साहब बीवी के जेवर गिरवी रखकर पैसा दिया था, कि नौकरी लग जाएगी तो घर की परिस्थितियां बदल जाएंंगी। अव्वल नौकरी तो लगी नहीं लेकिन ठगों को पैसा देने के बाद घर की परिस्थितियां जरूर बदल गईंं। पहले तो हालात कुछ ठीक थे, लेकिन अब तो और भी बदतर हो गए है। पैसा तो गया ही कर्जदार ऊपर से हो गए। यह पीड़ा उन नौजवानों की जिन्होंने नौकरी की लालच में आकर अपना बहुत कुछ दांव पर लगा दिया। जो अब इंसाफ के लिए सिर्फ अफसरों की कार्रवाई करने का इंतजार कर रहे है।  

अच्छी नौकरी की चाहत में कटरा चांद खां के दिनेश कर्जदार हो गए। स्वास्थ्य महकमा के बाबू को देने के लिए तीन लाख रुपये की जरूरत पड़ी तो दिनेश की पत्नी ने अपने जेवर लाकर उनके सामने रख दिए। संकोच बहुत रहा, लेकिन फिर भी दिनेश ने एक सुनार के पास जेवर को गिरवी रखकर पांच टका ब्याज पर ढाई लाख रुपये उधार लिए। अब नौकरी हाथ आई नहीं, लेकिन लोन का ब्याज चुकाने में दिनेश परेशान हो रहे है।

से उन्होंने दुख साझा करते हुए कहा कि 70 हजार रुपये का तो ब्याज ही चुकता कर चुका हूं। पहले एक निजी कंपनी में डिलीवरी ब्वाय था। दिनेश के बड़े भाई धर्मेंद्र की छोटी दुकान है। फिलहाल वही उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने पहली किस्त 6 अक्टूबर 2018 को दी। ढाई लाख नगद और 50 हजार विकास के खाते में ट्रांसफर किए। वह कहते है कि इतनी परेशानी झेलने के बाद उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए।

कर्जदार हुए किशन, रिश्तेदारों से लिए थे लाखों उधार

स्वास्थ्य महकमा में वार्ड ब्वाय बनने की ख्वाहिश रखने वाले बारादरी के किशनलाल को मालूम नहीं था कि ठगी का शिकार होने के बाद उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। दो भाइयों में बड़े किशन पर घर की जिम्मेदारी है। निजी कंपनी में छोटी सी नौकरी में वह खुश थे, इसी दौरान विकास से उनकी मुलाकात हुई। उन्हे प्रलोभन दिया गया कि वार्ड ब्वाय बन जाओगे तो अच्छी तन्ख्वाह होगी। परिवार का भी सहारा बन सकोगे।

किशन ने अपने मामा से दो लाख रुपये उधार लिए, बाकी रिश्तेदार और दोस्तों ने दिए। विकास को उन्होंने दो लाख 35 हजार नगद दिए। जबकि 65 हजार बैंक खाते में ट्रांसफर किए। बकौल किशन तीन अक्टूबर 2018 को पहली किस्त देने के बाद 20 अक्टूबर 2019 तक पूरी रकम वह विकास को दे चुके थे। मार्च 2019 में विकास ने जिला अस्पताल बुलाकर ज्वाइनिंग लेटर भी दिखाया था। बाद में उन्हें समझ आया कि वह फर्जीवाड़ा में फंस चुके हैं।