अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल ई. श्रीधरन, उनके जीवन से सीख ले सकता है हर कोई

 

देश में 'मेट्रोमैन' के नाम से मशहूर ई. श्रीधरन। (फोटो: प्रेट्र/फाइल)

मेट्रोमैन के नाम से मशहूर 89 वर्षीय ई. श्रीधरन इनदिनें अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की वजह से चर्चाओं में हैं। दिल्ली मेट्रो समेत देश के कई बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाने वाले ई. श्रीधरन का जीवन अनुशासन और ईमानदारी की एक मिसाल है।

नई दिल्ली। 'मेट्रोमैन' के नाम से मशहूर 89 वर्षीय ई. श्रीधरन अभी अपने गृह प्रदेश केरल से सियासी सफर शुरू करने की वजह से चर्चा में हैं। वह पेशे से सिविल इंजीनियर रहे हैं। कोंकण रेल और दिल्ली मेट्रो समेत देश के कई बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट में उनका अहम योगदान रहा है। अपने सराहनीय कार्य और ईमानदार छवि के कारण उन्हें ‘पद्म भूषण’, ‘पद्म विभूषण’ के अलावा कई प्रतिठष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। छह दशक तक तकनीकी विद्वान के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले ई. श्रीधरन समय की पाबंदी के भी मिसाल हैं। मुश्किल से मुश्किल टास्क को भी वह समय से पहले पूरा कराने के लिए जाने जाते रहे हैं। उनका जीवन, अनुशासन और कार्यशैली एक ऐसी मिसाल है, जिससे हर कोई सीख सीख ले सकता है।

गढ़ा नया बेंचमार्क

ई.श्रीधरन हमेशा प्रचलित प्रणाली के खिलाफ एक नया बेंचमार्क बनाने में यकीन रखते रहे हैं। चुनौतियों का सामना करने के लिये उन्हें जाना जाता है। उन्हें जब भी कोई कार्य सौंपा गया, तो वह उसे चुनौती के रूप में लेते थे और समय से पहले ही उसे पूरा करने का भरसक जतन करते थे। अपने इस प्रयास में उन्होंने ऐसा करके भी दिखाया। कोंकण रेलवे से पहले उन्होंने तमिलनाडु के ढह गये पंबन ब्रिज को 50 से भी कम दिनों में तैयार करा दिया था, जिसे 3 महीने में तैयार करने की समयसीमा थी। इस तरह वह हमेशा अपने सामने नया गोल सेट करते थे।

लक्ष्य पर ध्यान

श्रीधरन की तरह हम सभी में अपने दृढ़ विश्वास के साथ खड़े होने और निर्णय लेने का साहस होना चाहिए। अपने इसी गुण की वजह से उनके नाम के साथ एक के बाद एक उपलब्धियां जुड़ती रहीं। वे इधर-उधर की राजनीति पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते थे। हर समय सिर्फ अपने काम पर ही फोकस रखते थे। अपने मातहत कर्मचारियों के लिए भी वे एक डेडलाइन तय किया करते थे और उन्हें बार-बार उसकी याद दिलाते थे। वह किसी भी समस्या को अलग-अलग तरीके से हल करने की कोशिश करते थे, उसके लिए उपाय तलाशते थे।

छोटा टू-डू लिस्ट

परियोजनाओं के निर्माण के दौरान श्रीधरन अपने रोजाना के टू-डू लिस्ट के गोल को छोटा रखते थे और उसे पूरा करने के लिए सक्रिय रहते थे। छोटे-छोटे कदमों से एक बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। इसी तरह, जब समय अवधि कम हो, तो आपको भी बहुत सी चीजों पर ध्यान देने के बजाय कुछ ही चीजों पर फोकस करके उसे ही अच्छे तरीके से करने पर ध्यान देना चाहिए।