आपको भी झकझोर देगा एक मां का उसकी अजन्‍मी प्‍यारी बेटी के नाम लिखा ये खत, पढ़िएगा जरूर


इस खत में छलकता है एक मां का प्‍यार और उसका दर्द

अफगानिस्‍तान के हालात किसी से नहीं छिपे हैं। यहां के समाज की सोच महिलाओं के प्रति कैसी है ये भी किसी से छिपा नहीं रही है। यहां पर महिलाओं को बेहद हीन भावना से देखा जाता रहा है।

न्‍यूयॉर्क (संयुक्‍त राष्‍ट्र)। अफगानिस्‍तान एक ऐसा देश है जहां पर महिलाओं की दशा दशकों से बेहद बुरी रही है। आंकड़ों के मुताबिक यहां की हर तीन में से एक लड़की की शादी उसके 18 वर्ष की होने से पहले ही कर दी जाती है। वहीं यदि इनके साक्षर होने की बात करें तो 15 वर्ष तक की आयु की महज 19 फीसद लड़कियां ही अपनी पढ़ाई पूरी कर पाती हैं। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होगा कि यहां पर महिलाओं को लेकर लोगों की सोच कैसी होगी। इसके अलावा इस बात का भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर बेटी की किलकारी को लोग कितनी तवज्‍जो देते होंगे। इस बीच ये भी एक सच्‍चाई है कि इस तरह की सोच हर किसी की नहीं होती। कुछ ऐसे भी होते हैं जो आगे की राह खोलते हैं और ये बताने की कोशिश करते हैं कि बेटियां कितनी प्‍यारी होती हैं।

खत के जरिए उम्‍मीद, मेरी प्‍यारी बेटी  

ऐसी ही एक सोच आरिफा के खत में देखने को मिलती है। आरिफा उमीद, जो यूनिसेफ के लिए अफगानिस्‍तान में काम करती हैं, ने एक खुला खत अपनी उस अजन्‍मी बच्‍ची के नाम लिखा है कि जिसको वो सिर्फ अपने गर्भ में महसूस कर सकती हैं।  इसको उन्‍होंने अब तक देखा नहीं है न ही उन्‍हें इस बात का पता है कि उनके गर्भ में बेटी या बेटा पल रहा है। लेकिन वो दिल से चाहती हैं कि उन्‍हें एक बेटी हो। उनका लिखा ये खत जहां इस देश की लड़कियों के प्रति सोच को बताता है वहीं उनके उस प्‍यार को भी बताता है जो उनकी उम्‍मीदों में झलकता है।

बेहद सुंदर हो तुम बेटी 

इस खत की शुरुआत में उन्‍होंने लिखा है कि वो अपनी बेटी से अभी नहीं मिली हैं, लेकिन वो जानती हैं कि वो बेहद सुंदर है। उसकी काली आंखें, हंसता चेहरा, हल्‍के भूरे रंग के बाल और एक प्‍यारा सा दिल है। आरिफा लिखती हैं कि उन्होंने इस दिन का लंबे समय से इंतजार किया है। वो आगे लिखती हैं कि वो उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं जब वो उसको अपनी बांहों में लेकर, छाती से लगाकर प्‍यार कर सकेंगी। हालांकि अभी इसमें कुछ दिन और बचे हैं। आरिफा के गर्भ अभी सात माह का ही है। वो कहती हैं कि वो गर्भ के अंदर इसका हिलना पांव मारना महसूस करती हैं। वो इसको नटखट बेटी कहते हुए मन ही मन मुस्‍कुराती भी हैं। उन्होंने लिखा है कि जब ये बच्‍ची उनके गर्भ में नहीं आई थी तब से ही वो उसकी दुआ कर रही थीं। एक बार बाजार में उन्‍होंने एक बेहद सुंदर ड्रेस देखी थी, जिसमें वो उनकी बेटी बहुत सुंदर दिखाई देगी। इसलिए वो उसको खरीद कर ले आईं। उन्‍होंने खत में लिखा है कि इस ड्रेस में उनकी बेटी एक अफगानी राजकुमारी लगेगी।

बेटी को लेकर चिंता 

इस खत के दूसरे हिस्‍से में उनकी वो चिंता झलकती है जो किसी भी मां की हो सकती है। उन्‍होंने लिखा है कि वो उसनके भविष्‍य को लेकर चिंतित हैं। इसकी वजह है कि जब वो यहां की बच्चियों की कहानी सुनती हैं तो उन्‍हें अपनी बच्‍ची के बारे में चिंता सताने लगती है। हालांकि, उनकी बेटी बहुत बहादुर है, इसलिए उन्‍हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने अपनी इस अजन्‍मी बेटी के लिए सोचा है कि वो दोनों मिलकर अफगानी महिलाओं को उनके सपने पूरा करने में मदद करेंगे। उन्‍होंने लिखा है कि जहां वो जन्‍म लेने वाली है वो बेहद मुश्किलों भरी जगह है। उन्‍होंने इस खत में एक ऐसे व्‍यक्ति का जिक्र किया है जिसने अपनी पत्‍नी को इसलिए मार दिया था क्‍योंकि उसने एक बेटी को जन्‍म दिया था। इस बात को आरिफा भूल नहीं पा रही हैं।

मां ही जानती है दर्द 

उन्‍होंने आगे लिखा है कि एक मां के लिए उसके बच्‍चे को जन्‍म देना बेहद तकलीफदेह होता है। वो भी तब जब वहां पर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का अभाव हो। इसके बाद वो उस पल का इंतजार करती है जब बच्‍चे के जन्‍म पर उसको मुबारकबाद मिलेंगी। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो...। आरिफा नहीं जानती हैं कि जिस व्‍यक्ति की वो बात कर रही हैं उसने उस बच्‍ची के साथ क्‍या किया होगा। पता नहीं उसके पिता ने उस बच्‍ची का सौदा ही कर दिया हो। वो इस बात का सोचकर सिहर उठती हैं कि यदि वो बच्‍ची जिंदा है तो अपनी मां के लिए तरसती होगी। वो ऊपर वाले का शुक्रगुजार भी करती हैं कि उनके हालात उस जैसे नहीं हैं। उन्‍होंने लिखा है जब वो इस दुनिया में आएगी तो उसके पिता और उसके भाई भी उसे उतना ही प्‍यार देंगे जितना वो खुद उसे देना चाहती हैं। आरिफा लिखती हैं कि हम सभी मिलकर तुम्‍हारी हर तरह से रक्षा करेंगे।

वो खास पल...

इस खत में उन्‍होंने उस पल का भी जिक्र किया है जब वो पहली बार डॉक्‍टर के पास सोनोग्राम करवाने गई थीं। तब डॉक्‍टर ने उनसे पूछा था कि उन्‍हें क्‍या चाहिए। इसके जवब में आरिफा ने कहा था कि उन्‍हें बेटी चाहिए। इस पर डॉक्‍टर का जवाब था कि वो ऐसा कहने वाली उनकी यादगार में पहली महिला हैं। इस दौरान उन्‍हें ये भी पता चला कि उनसे पहले जिस महिला ने उन्‍हें दिखाया था उसने कहा था कि यदि उसने बेटी को जन्‍म दिया तो उसका पति उसको छोड़ दूसरी महिला से शादी कर लेगा। आरिफा खुद को बेहद सौभाग्‍यशाली मानती हैं। उन्होंने लिखा है कि उसको वो हर तरह से बेहतर जिंदगी और बेहतर हालात में बड़ी करेंगी। वो आगे लिखती हैं कि जब उनका जन्‍म बेहद गरीबी की हालत में हुआ था। उस वक्‍त उनकी मां पढ़ रही थीं। अपना घर भी नहीं था। उनकी मां हर संभव कोशिश के बाद भी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी और बच्‍चों को पालने में ही जिंदगी गुजार दी। लेकिन बाद में उन्‍होंने ही अपनी मां की पढ़ाई पूरी करने में मदद की।

सपनों को करेगी पूरा 

उन्‍होंने लिखा है कि अफगानिस्‍तान में महिलाएं हर रोज अपने सपनों को पूरा करने के लिए लड़ती हैं। तुम भी इस जंग का हिस्‍सा बनोगी और जीत हासिल करोगी। इसमें हम सब मदद करेंगे। जिस तरह से मैंने अपनी मां का सपना पूरा किया तुम भी उसी तरह से मेरा सपना पूरा करोगी। वो बार बार ऊपर वाले से दुआ करती हैं कि यहां की महिलाओं कोभी बराबर का हक हासिल हो, जिससे वो जिंदगी को सुकून से बसर कर सकें। बिना किसी डर के बेटियों को स्‍कूल भेज सकें और उन्‍हें शिक्षा दिला सकें। अंत में उन्होंने लिखा है कि उनकी यही इच्‍छा है कि उनकी आने वाली बेटी बेहद साहसी हो और उनके कंधों का सहारा बने।