आधुनिक तकनीक से युक्त होंगे स्लीपर कोच, यात्रा होगी सुखद और आरामदायक


रेलवे का थ्री टीयर एसी इकॉनॉमी क्लास कोच बनकर तैयार (फोटो: इंडियन रेलवे)

भारतीय रेल के इस एडवांस वर्जन स्लीपर कोच के जरिए यात्रियों के बेहद सुखद और आरामदायक सफर का एहसास होगा। इसके लिए रेलवे द्वारा एसी-3 इकॉनमी क्लास बनाई है। यह कोच अभी ट्रायल फेस में हैं और जल्द इन्हें यात्रियों के लिए पटरियों पर उतारा जा सकता है।

नई दिल्ली, एजेंसी। यात्रियों की सहूलियत में और इजाफा करने के लिए अब रेलवे का थ्री टीयर एसी इकॉनॉमी क्लास कोच बनकर तैयार है। नए डिजाइन के इस कोच में तमाम आधुनिक सुविधाएं ही नहीं बल्कि सीटों की संख्या में भी इजाफा कर दिया गया है। भारतीय रेल के इस एडवांस वर्जन स्लीपर कोच के जरिए यात्रियों के बेहद सुखद और आरामदायक सफर का एहसास होगा। इसके लिए रेलवे द्वारा एसी-3 इकॉनमी क्लास बनाई है। यह कोच अभी ट्रायल फेस में हैं और जल्द इन्हें यात्रियों के लिए पटरियों पर उतारा जा सकता है। ये कोच थर्ड एसी और स्लीपर क्लास के डिब्बों के बीच की रेंज के हैं। रेल मंत्रालय ने इसे दुनिया का सबसे सस्ता और सबसे बेहतरीन एसी यात्रा कोच कहा है। यह कोच अप्रैल से गरीब रथ और दूसरी ट्रेनों में लगेंगे। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने  आधुनिक कोच की एक वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट भी किया है।

कोच में 72 की जगह 83 सीट

पहले जहां 72 बर्थ (सीटें) की थीं, अब बढ़ाकर इसे 83 कर दिया गया है, जिससे बीस डिब्बों वाली ट्रेन में 220 सीटें अतिरिक्त होंगी। इससे वेटिंग लिस्ट का झंझट काफी हद तक खत्म होगा। यह कोच इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि दिव्यांग भी इसमें व्हीलचेयर के साथ ही प्रवेश कर सकेंगे और इनके लिए विशेष तरह के टॉयलेट भी डिजाइन किए गए हैं। पंजाब के रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) कपूरथला में यह डिब्बा तैयार कर मंजूरी के लिए लखनऊ स्थित रिसर्च डिजाइन एंड स्टेंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) को भेज दिया गया है।

जानें- आधुनिक कोच बनाने में कितना खर्च आएगा

अमूमन एक कोच बनाने पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इस आधुनिक डिब्बा को बनाने पर महज तीन लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करके नए डिजाइन का डिब्बा तैयार किया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक पैनल को रीडिजाइन किया गया है, ताकि सामान्य डिब्बों में पड़ने वाले फुट प्रिंट भी न पड़ें। इसी तरह यात्रियों की संख्या भी 72 से बढ़ाकर 83 की गई है। इसके अलावा मॉड्यूलर डिजाइन की सीट व बर्थ बनाए गए हैं, जबकि स्नैक टेबल भी इसमें लगाए गए हैं। इस कोच में बैठक क्षमता स्लीपर क्लास की तरह होगी, लेकिन इसमें एसी की सुविधाएं जोड़ दी गई हैं। इन डिब्बों को स्लीपर की बजाए एसी थ्री टीयर की तर्ज पर डेवलप किया गया है। इन कोच में वेस्टर्न और ईस्टर्न स्टाइल टॉयलेट डिजाइन में भी बदलाव किया गया है।

सीटों की संख्या बढ़ने से हर सीट पर दी गई एसी सुविधा

पहले 72 सीटें थीं और अब बढ़ाकर 83 कर दी गई हैं। ऐसे में यात्रियों को एसी का पूरा लाभ मिले, इसे लेकर भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसी कारण से हर सीट पर एसी वेंट (लग्जरी कारों की तरह हर सीट पर) दिया गया है। इसके अलावा मिडल और अपर बर्थ में ज्यादा हैडरूम दिया गया है। पुराने कोच में एक ही लाइट होती थी, जिसे ऑन करने पर दूसरे यात्री परेशान होते थे। लेकिन इस नए कोच में यदि व्यक्ति कुछ पढ़ना चाहता है, तो उसके लिए रीडिंग लाइट का बंदोबस्त किया गया है, जबकि नाइट लाइट भी इस कोच में लगाई गई है। मोबाइल चाìजग के लिए भी अलग से प्वाइंट दिए गए हैं। साथ ही खिड़कियों पर एडजस्टेबल पर्दे भी लगाए गए हैं।

आइसीएफ में होगी मॉडर्न कोच फैक्ट्री

तेजस ट्रेन की तर्ज पर ही नए कोच में आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी। वित्तीय वर्ष 2021-22 में चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आइसीएफ) तथा रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) में इस तरह के कोच तैयार किए जाएंगे। इसमें बनने वाले कोच के सभी गेट ऑटोमेटिक होंगे। ट्रेन के स्टेशन से निकलते ही इसके सभी दरवाजे स्वत: ही बंद हो जाएंगे। इसका रिमोट कंट्रोल गार्ड के पास ही होगा। इस आधुनिक सुविधा से ट्रेनों में होने वाली लूटपाट सहित अन्य हादसों में भी कमी आएगी। टॉयलेट भी इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि सीट पर बैठे ही पता चल जाएगा कि टॉयलेट खाली है या नहीं। टॉयलेट के गेट पर खाली और इस्तेमाल होने की सूचना देने के लिए लाइट्स लगाई गई हैं।