नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर अमित शाह

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। (फाइल फोटो)

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर एक संदेश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि नई शिक्षा नीति सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण विकास और सशक्तिकरण के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नई दिल्ली, पीटीआइ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि नई शिक्षा नीति सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, विकास और सशक्तिकरण के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर एक संदेश में अमित शाह ने कहा कि मातृभाषा अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के इस्तेमाल के लिए अधिकतम प्रयास किए जाने चाहिए।

अमित शाह ने ट्वीट करके कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह दिवस हमें हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है। हमें अपनी मातृभाषा का अधिकतम उपयोग करना चाहिए व बच्चों में अपनी संस्कृति की नींव को मजबूत करने के लिए मातृभाषा के ज्ञान संस्कार से पल्लवित करना चाहिए। मातृभाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम व संस्कृति की सजीव संवाहक होती है। यह व्यक्तित्व के निर्माण, विकास और उसकी सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाती है। हमारी नई शिक्षा नीति सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, विकास व उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हर साल 21 फरवरी को मनाया जाता है मातृभाषा दिवस

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर साल 21 फरवरी को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसका मकसद दुनियाभर में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस साल इश समारोह की थीम 'शिक्षा और समाज में समावेश के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देना' है। नवंबर 1999 में यूनेस्को ने 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद से हर साल इस दिन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।

21 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

1952 में 21 फरवरी को ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भाषायी नीति का विरोध किया। उन्होंने यह प्रदर्शन अपनी मातृभाषा के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए किया।  बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग थी। प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी पुलिस ने गोलियां चलाईं, लेकिन विरोध जारी रहा और बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा मिला।