न्यूजीलैंड में अनोखा मामला, संसद में टाई ना पहनने पर सांसद को दिखाया बाहर का रास्ता


न्यूजीलैंड में हंगामा, आदिवासी सांसद को टाई ना पहनने पर दिखाया बाहर का रास्ता

न्यूजीलैंड की संसद में एक सांसद को टाई ना पहनने पर बाहर निकाल दिया गया। आदिवासी नेता Rawiri Waititi ने कहा कि टाई पहनना गुलामी का प्रतीक है जो उन्हें कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि हम आदिवासी को क्यों रोका जाता है?

वेलिंग्टन, रॉयटर्स। न्यूजीलैंड में एक अनोखा मामला सामने आया है। एक सांसद को टाई ना पहनने पर सजा दी गई है। दरअसल, आदिवासी सांसद राविरी वेइटिटि  ने संसद में टाई  पहनने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें संसद से बाहर निकाल दिया गया। सांसद ने कहा कि टाई न पहनने का नियम आधुनिक समय में उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी सदन में मेक्सिको मूल के सांसद भी हैं जो, अपनी पारंपरिक टाई पहनते हैं, लेकिन उन पर किसी को कोई दिक्कत नहीं है? उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि हम आदिवासी को क्यों रोका जाता है? उन्होंने कहा कि टाई हमारे लिए गुलामी का प्रतीक है और हम इसे नहीं पहनेंगे, जिसके बाद न्यूजीलैंड में नया विवाद खड़ा हो गया है। 

स्पीकर के फैसले की हो रही आलोचना

स्पीकर ट्रेवर मलार्ड  ने आदिवासी सांसद राविरी वेइटिटि को नसीहत देते हुए कहा कि यदि उन्हें सरकार से सवाल पूछने हैं, तो उन्हें टाई पहननी होगी, लेकिन जैसे ही सांसद ने इससे इनकार किया तो उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद स्पीकर के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है। 

पहले भी हो चुका है विवाद

बता दें कि कुछ दिन पहले भी स्पीकर ने राविरी वेइटिटि से कहा था कि यदि वे सरकार के किसी मंत्री से सवाल पूछना चाहते हैं तो उन्हें नियमों के मुताबिक टाई पहननी होगी। राविरी माओरी आदिवासी जनजाति से संबंध रखते हैं और माओरी पार्टी के सदस्य हैं। इस बार वह सदन में टाई के बजाए जनजाति से जुड़ा एक लॉकेट पहनकर पहुंच थे। इसके बाद स्पीकर ने उन्हें अपने चैम्बर में भी बुलाकर समझाया की टाई पहनना जरूरी है, लेकिन उन्होंने साफ मना करते हुए इसे गुलामी का प्रतीक बताया।

सांसदों से टाई पहनने को लेकर पूछे गए थे सवाल

बता दें कि पिछली साल जब न्यूजीलैंड में टाई का मुद्दा पहली बार उठा था तब स्पीकर ने सभी सांसदों से कहा था कि सभी इस बारे में अपने सुझाव लिखित में दें। जवाब में ज्यादातर सांसदों ने कहा था कि टाई पहनने का नियम बिल्कुल सही है। इसके बाद नियम जारी रहा।