कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है बजरंग दल कार्यकर्ता की सरेआम हत्या

 


हमलावरों को कानून का जरा भी भय नहीं था।

बजरंग दल कार्यकर्ता की एक समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हत्या कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक सभ्य समाज में इस तरह के जघन्य अपराध को किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

नई दिल्‍ली, राज्य ब्यूरो।  दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में बजरंग दल कार्यकर्ता की घर में घुसकर एक समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हत्या किया जाना अत्यंत निंदनीय है। मामला तब और भी गंभीर हो जाता है, जब यह सामने आता है कि आरोपित संख्या में अधिक थे और बुधवार देर रात साजिशन सभी पीड़ित के घर में घुसे थे। इस दौरान उन्होंने घर में मौजूद सभी लोगों से मारपीट की और कार्यकर्ता की चाकू मारकर हत्या कर दी।

यही नहीं, हमलावर इतने बेखौफ थे कि घायल कार्यकर्ता को स्वजन जब अस्पताल ले जा रहे थे, उस समय भी आरोपितों ने पीड़ितों से मारपीट की। पीड़ित परिवार घायल को अस्पताल ले जाने में किसी तरह सफल हो गया, लेकिन हमलावर अस्पताल भी पहुंच गए और वहां भी परिजनों से मारपीट और गालीगलौज की। अस्पताल में घायल की सर्जरी कर चाकू निकाल दिया गया, लेकिन अत्यधिक खून बहने के कारण उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गई। पूरे घटनाक्रम से साफ पता चलता है कि हमलावरों को कानून का जरा भी भय नहीं था।

राष्ट्रीय राजधानी में यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह सही है कि इस मामले में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए चार आरोपितों को चंद घंटे में दबोच लिया, लेकिन पीड़ित परिवार का दावा है कि आरोपितों की संख्या 15-20 थी। ऐसे में पुलिस को पूरे मामले की गहन पड़ताल करनी चाहिए और पीड़ितों के दावे को भी जांचा जाना चाहिए।

ऐसा कतई नहीं होना चाहिए कि इस खौफनाक मामले में एक भी आरोपित किसी तरह बच जाए। इस मामले में सभी आरोपितों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जानी चाहिए और उनके खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाकर उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलवाई जानी चाहिए