म्यांमार में सैन्य शासन ने नागरिकों के मौलिक अधिकार छीने, निलंबित किए तीन कानून, सड़क पर उतरे लोग

 

म्यांमार में सेना ने नागरिकों की स्वतंत्रता से संबंधित तीन मौलिक कानूनों को निलंबित कर दिया है।

म्यांमार की सत्ता पर काबिज सेना ने अब प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए नागरिकों की स्वतंत्रता से संबंधित तीन मौलिक कानूनों को निलंबित कर दिया है। सैन्य तख्तापलट के खिलाफ लगातार नवें दिन भी अधिकांश शहरों में प्रदर्शन हुए।

यंगून, एजेंसियां। म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ लगातार नवें दिन भी अधिकांश शहरों में जनता का सैलाब सड़कों पर दिखा। सत्ता पर काबिज सेना ने अब प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए नागरिकों की स्वतंत्रता से संबंधित तीन मौलिक कानूनों को निलंबित कर दिया है। देश के बड़े शहर यंगून में रविवार को इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं ने सफेद कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। इनके हाथों में नेता आंग सान सू की की रिहाई की तख्तियां लगी हुई थीं। यहां पर बसें हॉर्न देते हुए धीरे-धीरे चल रही थीं।

सड़प पर उतरे लोग

राजधानी नेपीता में भी जनता ने मोटरसाइकिल और कारों की लंबी रैली निकाली। दक्षिण पूर्व समुद्र तटीय शहर डवे में कड़ी धूप के बावजूद हजारों लोग इकट्ठा हो गए। म्यांमार के अन्य शहरों में भी इसी तरह से जनता ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए।

क्‍यों जरूरी हैं ये तीन कानून

सैन्य नेतृत्व में काम कर रही प्रादेशिक काउंसिल ने व्यक्तिगत सुरक्षा और स्वतंत्रता से संबंधित कानून की धारा 5, 7 और 8 को निलंबित कर दिया है। धारा 5 में निजता के अधिकार का प्रावधान है। प्रशासन बिना स्थानीय दो गवाहों के किसी के घर में घुसने, तलाशी लेने या गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं रखता है। धारा सात में प्रावधान है कि 24 घंटे से ज्यादा समय तक गिरफ्तारी पर अदालत में पेश किया जाना अनिवार्य है। धारा 8 व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है। इसमें किसी के घर या निजी कमरे में घुसने के लिए कानूनी उपचार आवश्यक हैं।

टोक्यो में भी विशाल प्रदर्शन

इधर जापान की राजधानी टोक्यो में हजारों लोगों ने म्यांमार में लोकतंत्र बहाली को लेकर विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में म्यांमार की नेता आंग सान सू की के चेहरे की तस्वीरें थीं। यह जापान में कुछ सालो में सबसे बड़ा प्रदर्शन था।

झूठ फैलाने वाले म्यांमार सेना के पेज फेसबुक ने नियंत्रित किए

समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक म्यांमार में सत्ता पर काबिज हुई सेना फेसबुक पेजों के माध्यम से गुमराह करने वाली जानकारियां दे रही है। फेसबुक ने इन पेजों को नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। म्यांमार टाइम्स के अनुसार फेसबुक ने कहा है कि सेना ने 2020 के चुनाव में धोखाधड़ी और विदेशी हस्तक्षेप का झूठ प्रचारित किया है। उसे हटाया जा रहा है। हमारी नजर सैन्य शासन और उसकी गतिविधियों पर है। यह सब म्यांमार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।