कैट ने की ई-कॉमर्स व जीएसटी मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की मांग

 

कैट ने जीएसटी कर प्रणाली को सरल बनाने की अपील की है।

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के जटिल प्रावधानों और ई-कॉमर्स कंपनियों की कथित मनमानी के खिलाफ भारत व्यापार बंद के आह्वान के बीच कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है।

नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के जटिल प्रावधानों और ई-कॉमर्स कंपनियों की कथित मनमानी के खिलाफ "भारत व्यापार बंद' के आह्वान के बीच कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्हें पत्र भेजकर कैट ने कहा कि वे जीएसटी कर प्रणाली को सरल बनाने और ई-कॉमर्स व्यापार को बड़ी कंपनियों की कुटिल प्रथाओं के चंगुल से निकालने के मामले में हस्तक्षेप करें। इसी तरह बैंकों और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच अनैतिक सांठगांठ को भी तोड़ने की अपील की है।

पत्र में कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया व राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने याद दिलाया कि जीएसटी को लागू करने से पहले पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट कहा था कि यह बेहतर व अत्याधिक सरल कर प्राणली होगी, जिसके तहत व्यापारियों को केवल एक बार जीएसटी पोर्टल पर अपनी बिक्री के विवरण अपलोड करना आवश्यक होगा। इसके बाद पोर्टल ही स्वचालित रूप से बाकी सब कार्यवाई करेगा। व्यापारियों को केवल कर जमा कराना व रिटर्न जमा करना होगा जिससे व्यापारी आसानी से कर पालन कर सकेंगे।

इसी तरह ई-कॉमर्स का मामला उठाते हुए खंडेलवाल ने कहा कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के ई-कॉमर्स बाजार को विषाक्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं और खुलेआम सरकार के कानूनों, नियमों एवं नीतियों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्हें कानून और नियमों का उल्लंघन करने में कोई भय नहीं है। विशेष रूप से सरकार की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) नीति के प्रेस नोट 2 में जो प्रतिबंधित हैं उसको इन कंपनियों ने अपना व्यापारिक मॉडल बना लिया है और अब वे धीरे-धीरे ईस्ट इंडिया कंपनी का दूसरा संस्करण बनते जा रहे हैं।