विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में बढ़ी अवैध हथियारों की मांग, झारखंड से हो रही आपूर्ति

 

अपराधियों का दावा है कि सप्लाई के मुताबिक माल देना मुश्किल हो रहा है।
 बिहार के मुंगेर के मुकाबले झारखंड में बनने वाले हथियारों पर अपराधी ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। इससे पैसे की बचत हो रही है। माल की डिलीवरी भी जल्‍द हो रही है। इसके लिए कई गैंग सक्रिय हैं।

रांची, पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अवैध हथियारों की मांग बढ़ गई है। इस वजह से अवैध हथियारों की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। दिनों दिन बढ़ती कीमतों पर हथियारों की बिक्री हो रही है। बिहार के मुकाबले झारखंड से हथियारों की सप्लाई ज्यादा आसान से हो रही है। ऐसे में बंगाल में सक्रिय अपराधियों के अलग-अलग गिरोह हथियारों की आपूर्ति के लिए झारखंड में हथियार सप्लायरों पर भरोसा जता रहे हैं। पैसे के साथ-साथ समय की भी बचत हो रही है। हथियारों की तस्करी में नक्सली और उग्रवादी भी शामिल हैं।

झारखंड से लगने वाले पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में सप्लाई के लिए कई अलग-अलग ठिकाने बनाए गए हैं। ये ठिकाने नक्सलियों और उग्रवादियों के संरक्षण में संचालित हो रहे हैं। दोपहिया, चार पहिया वाहन के साथ-साथ सामानों की आपूर्ति के लिए एक से दूसरे राज्यों में आवागमन कर रहे वाहनों के जरिए सप्लाई की जा रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो हथियारों की खेप सब्जियों की गाड़ी, जूते-चप्पल और चिप्स, बिस्किट के बाॅक्स में रखकर पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं कुछ अपराधी एंबुलेंस में हथियारों की खेप भेज रहे हैं।

चुनाव में हिंसा की आशंका

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हिंसा की प्रबल आशंका जताई जा रही है। इस आशंका के पीछे बड़ी वजह बंगाल के अपराधियों से झारखंड के अवैध हथियारों के सौदागरों को मिले रहे बड़े ऑर्डर हैं। इसमें देसी कट्टा, नाइन एमएम पिस्टल, कारबाइन, सिक्सर व बम की डिमांड है। बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान की सप्लाई के लिए अलग से कई गिरोह सक्रिय हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि अपराधी डिमांड को पूरा करने में दिन रात लगे हुए हैं। हाल के दिनों में रांची और आसपास के इलाके में अवैध हथियारों के कारखानों पर पुलिस ने दबिश देकर थोक में हथियार बनाने के सामान की बरामदगी की थी।

अवैध हथियारों की नई कीमतें

हथियार    पुरानी दर        नई दर

देसी कट्टा : दो से पांच हजार रुपये,  8000 तक

नाइन एमएम पिस्टल : 15 से 45 हजार रुपये,  55 हजार तक

कारबाइन : एक से डेढ़ लाख रुपये, ढाई से तीन लाख तक

सिक्सर : छह से 15 हजार,  25 से 45 हजार तक

अलग-अलग एजेंट सक्रिय, एडवांस के बाद होती है डिलीवरी

चुनाव को देखते हुए अवैध हथियारों की मांग बढ़ी है। पहले अधिकांश हथियारों की खपत राज्य में हो जाती थी। पिछले दो महीने से बंगाल से बहुत सप्लाई आ रही है। यही कारण है कि राज्य में पहले से मिलने वाले हथियारों की कीमतों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। बंगाल के अलग-अलग जिलों से सप्लाई लेने के लिए लोग आ रहे हैं। एडवांस देकर चले जाते हैं। वहां सामान पहुंचाने पर ही पूरा भुगतान होता है। ग्रामीण इलाकों में नए हथियारों की टेस्टिंग तक होती है।

इसके बाद ही कीमत पर फाइनल मुहर लगती है। पहले हथियार की सप्लाई मुख्य रूप से बिहार से होती थी। यह ज्यादा खर्चीला था। झारखंड में अब असेंबल कर हथियार बना लिए जा रहे हैं जो बिहार से कम कीमत पर ज्यादा सुरक्षित तरीके से ठिकानों तक पहुंचते हैं। बम बनाने के सामान की सप्लाई अलग गिरोह कर रहा है। हथियार लेने वाले किस दल या प्रत्याशी के लिए काम करते हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं हैं। सप्लायरों का काम बस डिलीवरी देना होता है।

केस स्टडी-1: हाल में मिनी गन फैक्ट्री का हुआ था भंडाफोड़

बीते 25 जनवरी को रांची पुलिस ने मांडर में चल रही मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। आम्र्स सप्लायर मो. रकीब के अलावा अन्य अपराधी गिरफ्तार किए गए थे। कारबाइन, दो पिस्टल, एक देशी कट्टा, हथियार बनाने वाला लेथ मशीन, स्प्रिंग कटर, हेक्सा ब्लेड, होल मशीन, बैरल सहित अन्य सामान बरामद किए गए थे। एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने ग्रामीण एसपी नौशाद आलम के नेतृत्व में इस मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था।

केस स्टडी-2: शनिवार को पकड़ा गया बनारस का कुख्यात अपराधी रवि पटेल रांची में रहकर हथियारों की सप्लाई कर रहा था। वह गाजीपुर से हथियार लाकर धनबाद के सप्लायरों को देता था। वहां से दूसरी जगहों पर हथियार भेजे जा रहे थे।

'अवैध हथियारों के सप्लायर गिरोह पर नकेल कसने के लिए पुलिस लगातार काम कर रही है। हाल में कुछ जगहों पर अवैध फैक्ट्रियों को नष्ट किया गया है। हर सूचनाओं के सत्यापन के बाद कार्रवाई की जा रही है।' -सुरेंद्र कुमार झा, एसएसपी रांची।