लॉकडाउन में मामूली गलती करने वालों पर CM योगी आदित्यनाथ मेहरबान, वापस होंगे ढाई लाख से अधिक केस

मामूली या हल्की गलती करने वालों पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा दिल दिखाया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस केस वापसी के फैसले से करीब ढाई लाख से अधिक लोग लाभांवित होंगे। इनके खिलाफ मास्क न पहनने या स्तरीय मास्क न पहनने जैसे मामले में केस दर्ज हैं। कहीं-कहीं पर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर केस दर्ज किया गया।

लखनऊ। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण में लॉकडाउन के दौरान मामूली या हल्की गलती करने वालों पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा दिल दिखाया है। लॉकडाउन के दौरान कोविड प्रोटोकॉल में छोटी गलती करने वालों के खिलाफ प्रदेश सरकार केस वापस लेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस केस वापसी के फैसले से करीब ढाई लाख से अधिक लोग लाभांवित होंगे। इन सभी के खिलाफ मास्क न पहनने या स्तरीय मास्क न पहनने जैसे मामले में केस दर्ज हैं। इसके साथ ही कहीं-कहीं पर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर भी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अब इन प्रकरणों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहनीय फैसला लिया है। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान आम जनता पर मामूली अपराध में दर्ज ढाई लाख से ज्यादा मुकदमें वापस लेने का आदेश दिया है। इनके इस आदेश से बड़ा वर्ग लाभान्वित होगा।

योगी आदित्यनाथ सरकार उत्‍तर प्रदेश के व्‍यापारियों के बाद अब प्रदेश के लाखों लोगों को लॉकडाउन के दौरान हुए मुकदमों में बड़ी राहत देने जा रही है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने प्रदेश में आमजन के ऊपर कोविड-19 और लॉकडाउन तोड़ने को लेकर दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने के निर्देश दिए हैं। इससे प्रदेश के ढ़ाई लाख से अधिक लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।  कोविड-19 और लॉक डाउन तोड़ने के मामलों में पुलिस और कचहरी के चक्‍कर लगा रहे यूपी के लाखों लोगों व व्‍यापारियों को जल्‍दी इन चक्‍करों से छुटकारा मिल जाएगा। सरकार प्रदेश भर के थानों में लॉकडाउन की धारा 188 के उल्‍लंघन को लेकर दर्ज हुए मुकदमें वापस लेने की तैयारी कर रही है। अभी हाल ही में सरकार ने प्रदेश भर के व्‍यापारियों के खिलाफ लॉकडाउन के दौरान दर्ज हुए मुकदमें वापस लिए जाने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद कानून मंत्री बृजेश पाठक ने व्‍यापारियों पर दर्ज मुकदमों का ब्‍योरा जुटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि कोविड के मुकदमों से आम लोगों को अनावश्‍यक परेशानी उठानी पड़ेगी। थानों में दर्ज मुकदमें वापस होने के बाद लोगों को परेशानी से भी मुक्ति मिल जाएगी।

सरकार के कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ने और लॉक डाउन के उल्‍लंघन के मुकदमें वापस लेने से आम लोगों व व्‍यापारियों को राहत मिलेगी। साथ ही सरकार का मानना है कि इससे न्‍यायालय पर से मुकदमों का बोझ कम होगा। वहीं, लोगों को कचहरी व पुलिस थानों के चक्‍कर काटना नहीं पड़ेंगे। इसका सबसे अधिक लाभ व्यापारी वर्ग को होगा। प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने व्यापारियों के साथ बैठक के बाद बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष मामूली गलती करने वाले ढाई लाख से अधिक लोगों के खिलाफ कोविड एक्ट के तहत दर्ज केस वापस लेने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद राज्य सरकार कोविड-19 और लॉकडाउन तोडऩे को लेकर दर्ज हल््की धारा के मुकदमों को वापस लेने का मन बना लिया था। इस बारे में कानून मंत्रालय ने अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी कर दिया था।

व्यापारियों के साथ अन्य लोगों पर दर्ज कोविड व लॉकडाउन से जुड़े मामले के केस वापस लेने का फैसला किया गया था। इस बाबत आज दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार के इस फैसले से हजारों व्यापारियों के साथ ही बड़ी संख्या में कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों को भी राहत मिलेगी। कोविड 19 प्रोटोकाल तोडऩे और लॉकडाउन के उल्लंघन के मुकदमे वापस लेने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। सरकार ने मुकदमों की वापसी के साथ ही उन्हेंं भविष्य में ऐसी स्थितियों में विशेष एहतियात बरतने की चेतावनी भी दे दी है। इन मुकदमों की वापसी से पुलिस और कोर्ट का बोझ भी कम होगा और उन्हे आवश्यक चीजों की जांच के लिए मौका मिल सकेगा।