गोवा के CM प्रमोद सावंत ने केंद्र से महादयी नदी के मुद्दे के साथ खनन गतिविधियों पर की चर्चा

 

गोवा के CM प्रमोद सावंत ने केंद्र से महादयी नदी के मुद्दे के साथ खनन गतिविधियों पर की चर्चा

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने महादयी नदी के मुद्दे पर केंद्र के हस्तक्षेप और खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में एनआइटीआई के गवर्निंग काउंसिल की 6वीं बैठक के दौरान सावंत ने कई मुद्दों को उठाया।

पणजी, एएनआइ। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने महादयी नदी के मुद्दे पर केंद्र के हस्तक्षेप और खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में एनआइटीआई के गवर्निंग काउंसिल की 6वीं बैठक के दौरान  सावंत ने कई मुद्दों को उठाया और लगभग 11 मिनट तक अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने न्यूज एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने एनआइटीआई और प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि अगर महादयी पानी को कर्नाटक द्वारा हटाने की अनुमति दी जाती है तो राज्य को भविष्य में पीने के पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। 

महादयी पर याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित

मुख्यमंत्री ने बताया कि महादयी पर याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सावंद ने प्रधानमंत्री से कहा  कि डायवर्जन का असर केवल वनस्पतियों और जीवों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि भविष्य में पीने के पानी की कमी भी पैदा होगी। 

क्या है महादयी विवाद

महादयी नदी का कर्नाटक के बेलगावी जिले में खानापुर से होते हुए इसमें कई सारी जलधाराएं आकर मिल जाती हैं। यह नदी उत्तरी गोवा में सत्तारी तालुक नाम की जगह से प्रवेश करती है। गोवा में इस नदी को मंडोवी के नाम से जाना जाता है। गोवा में 11 नदियां बहती हैं, इनमें से मंडोवी और जुआरी नदी सबसे प्रमुख है। मंडोवी नदी पणजी के पास अरब सागर में गिर जाती है। उद्गम से अरब सागर में गिरने तक इसकी लंबाई 111 किलोमीटर है। इसमें से दो तिहाई हिस्सा यानी 76 किलोमीटर गोवा में बहता है।गोवा की बाकी नदियों में खारा पानी है ऐसे में मंडोवी गोवा में मीठे पानी का सबसे बड़ा स्रोत है और साथ ही ये मछलीपालन का सबसे बड़ी केंद्र भी है। ऐसे में मंडोवी नदी का पानी कर्नाटक और गोवा के साथ महाराष्ट्र को भी मिलता है।