IIT कानपुर के ही एक प्रोफेसर ने कहा प्रणाली पहले से तैयार, सरकार करे इस्तेमाल
प्रो. एसएन त्रिपाठी ने किया प्रदूषण के स्रोत पहचानने की तकनीक बनाने का दावा।

वायु प्रदूषण की जड़ों पर प्रहार करने के लिए दिल्ली सरकार ने आइआइटी कानपुर दिल्ली और टेरी के सहयोग से जो प्रणाली तैयार करने की घोषणा की है उसे आइआइटी कानपुर के ही एक अन्य प्रोफेसर ने काफी पहले ही विकसित कर लेने का दावा किया है।

 नई दिल्ली। वायु प्रदूषण की जड़ों पर प्रहार करने के लिए दिल्ली सरकार ने आइआइटी कानपुर, दिल्ली और टेरी के सहयोग से जो प्रणाली तैयार करने की घोषणा की है, उसे आइआइटी कानपुर के ही एक अन्य प्रोफेसर ने काफी पहले ही विकसित कर लेने का दावा किया है।

प्रोफेसर ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के चेयरमैन शिवदास मीणा को एक पत्र लिखकर इससे अवगत भी कराया है। साथ ही दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपेक्षा की है कि इस प्रोजेक्ट में उनकी टीम को शामिल कर समय और संसाधनों की बचत की जाए। 

आइआइटी-कानपुर में सेंटर फार एनवायरमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस.एन. त्रिपाठी ने अपने पत्र में लिखा है कि किसी स्थान पर वास्तविक समय में वायु प्रदूषण के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए रियल टाइम सोर्स अपोरशनमेंट आफ एयर पोल्यूशन प्रणाली देश में सबसे पहले उन्होंने ही विकसित की है और सीपीसीबी के सहयोग से इस पर पिछले कई सालों से काम कर रहे हैं। इस पर उनके छह शोध पेपर प्रकाशित हो चुके हैं और एक रिपोर्ट भी आ चुकी है। 

बकौल प्रो. त्रिपाठी रियल टाइम सोर्स अपोरशनमेंट (आरटीएसए)के तहत कोरोना के कारण लॉकडाउन में भी दिल्ली के प्रदूषण पर सीपीसीबी के लिए एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। एक अन्य रिपोर्ट और शोध पेपर भी जल्द ही आने वाला है। ऐसे में जबकि उनके पास इस प्रणाली का अनुभव और सभी संसाधन मौजूद हैं तो इसे दोबारा नए सिरे से विकसित कराना समय और पैसों दोनों की बर्बादी है।

उन्होंने यह भी कहा है कि वायु प्रदूषण के मूल स्रोत पता करके समस्या का निदान करने के लिए आरटीएसए बहुत कारगर प्रणाली है। इसलिए बेहतर हो कि केजरीवाल सरकार उन्हें और उनकी टीम को भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाए। अगर ऐसा होता है तो इससे काम जल्दी शुरू हो सकेगा, कारगर ढंग से हो सकेगा। सबसे अहम बात यह कि समय और संसाधनों का भी सदुपयोग हो सकेगा।