100 रुपये दूध बेचे जाने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने दी सफाई, कहा- इससे हमारा वास्ता नहीं

 

सफाई में कहा कि उनके नाम पर गलत संदेश वायरल किया जा रहा है, किसान इसे नजरअंदाज करें।
संयुक्त किसान मोर्चा (Sanyukt Kisan Morcha) ने अपने अहम बयान में कहा है कि 100 रुपये किलो दूध बेचे जाने के फैसले से हमारा कोई लेना देना नहीं है। किसान इस वायरल मैसेज को नजरअंदाज करें।

नई दिल्ली/सोनीपत, संवाददाता। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद करने की मांग को लेकर दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन 100 दिन से भी अधिक समय से जारी है। सोमवार को सिंघु के साथ टीकरी, गाजीपुर और शाहजहांपुर बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान जमा हैं  और तीनों कृषि कानूनों को रद करने की मांग पर अड़े हैं। इस बीच 100 रुपये लीटर दूध बेचने के खाप पंचायतों के फैसले के मद्देनजर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का आधिकारिक बयान भी आया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने अहम बयान में कहा है कि 100 रुपये किलो दूध बेचे जाने के फैसले से हमारा कोई लेना देना नहीं है। किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने सफाई में कहा कि उनके नाम पर गलत संदेश वायरल किया जा रहा है, किसान इसे नजरअंदाज करें।

उनके नाम पर किया जा रहा गलत संदेश वायरल

दूध की कीमत 100 रुपये किलो करने के सवाल पर संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि उनकी ओर से ऐसी कोई घोषण नहीं की गई है। उनका कहना है कि उनके नाम पर गलत संदेश वायरल किया जा रहा है और ऐसे में किसान इसके बहकावे में न आएं और इस मैसेज को नजरअंदाज करें। 

यह है पूरा मामला

गौरतलब है कि हरियाणा के हिसार और जींद में पिछले दिनों हुई खाप पंचायतों और किसानों ने मिलकर दूध 100 रुपये प्रति किलो बेचने का फैसला किया था। यह भी कहा गया था कि आम जनता को तो दूध पुरानी कीमत पर मिलेगा,वहीं, सहकारी संस्थाओं से एक लीटर दूध के एवज में 100 रुपये लिए जाएंगे। 

यह है संयुक्त मोर्चा का आधिकारिक बयान

'किसानों द्वारा 1-5 मार्च के बीच दूध की बिक्री के बहिष्कार और 6 तारीख से दूध की कीमत 100 रुपये प्रति किलो करने संबंध सयुंक्त किसान मोर्चे ने कोई आह्वान नहीं किया गया है. संयुक्त किसान मोर्चा के नाम से गलत तरीके से सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हो रहा है और इस संदर्भ में स्पष्टीकरण दिया जा रहा है कि यह मैसेज गलत है. किसानों से अनुरोध है कि वे इस तरह के गलत संदेश को नजरअंदाज करें, जो उन्हें संयुक्त किसान मोर्चा के नाम से मिल रहा है।'