13 दिनों तक बलिया को ब्रितानी हुकूमत से आजादी के गवाह बने थे बब्बन सिंह

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13 दिनों तक बलिया को ब्रितानी हुकूमत से आजादी के गवाह बने थे बब्बन सिंह
आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले मूल रूप से जनपद बलिया उत्तर प्रदेश के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बब्बन सिंह बलिया को 13 दिन की ब्रितानी आजादी के गवाह बने थे। इस दौरान बलिया पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का कब्जा रहा!

रुद्रपुर : आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले मूल रूप से जनपद बलिया उत्तर प्रदेश के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बब्बन सिंह बलिया को 13 दिन की ब्रितानी आजादी के गवाह बने थे। इस दौरान बलिया पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का कब्जा रहा और उन्होंने अपने हिसाब से शासन किया। 13 दिन बाद अंग्रेज नदी के रास्ते बलिया में घुसे और दोबरा अपना शासन कायम किया था। 

आजादी के बाद रुद्रपुर के फुलसुंगा में आकर बसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बब्बन सिंह का निधन 97 वर्ष की आयु में 29 सितंबर 2019 को भले ही हो गया हो लेकिन आजादी की लड़ाई में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है। आज भी उनका जज्बा फिजाओं में तैर रहा है। जब आजादी के लिए पूरे देश में लड़ाई अपने चरम पर पहुंच चुकी थी तो बलिया के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम छेड़ी तो वह इतिहास बन गई। इस संघर्ष के मुखिया थे चीतू पांडे और उनकी अगुवाई में पूरा बलिया अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गया था उस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण अंग बब्बन सिंह भी थे। 

एकजुटता का परिचय देते हुए बलिया के हजारों की संख्या में आंदोलनकारियों ने रेल पटरी के साथ सड़क मार्ग काट कर बलिया को 13 दिनों तक बलिया ब्रिटिश शासन से मुक्त रखा था। अंग्रेजों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन वह जब बलिया में प्रवेश नहीं कर पाए तो उन्होंने अपना वर्चस्व कायम करने के लिए  बलिया में प्रवेश के लिए पानी का मार्ग चुना और नदी के रास्ते बलिया तक पहुंचने में सफलता हासिल कर 13 दिन बाद उन्होंने पुन: बलिया पर अपना कब्जा कर आंदोलनकारियों को जेल में डाल दिया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बब्बन सिंह के पुत्र नवीन कुमार सिंह बताते है कि उनके पिता का देश के प्रति जज्बा आज भी उनके अंदर नया जोश भरने का काम तरता है।