उत्तरी दिल्ली नगर निगम की बैठक में AAP महिला पार्षद ने की आत्मदाह की कोशिश

 

आप पार्षद गुड्डी देवी ने महापौर के आसन पास आकर दी आत्मदाह की चेतावनी।
 आप पार्षद गुड्डी देवी ने महापौर के आसन पास आकर आत्मदाह की चेतावनी दी। गुड्डी देवी ने दावा किया कि उनके हाथ में जो बोतल है उसमें मिट्टी का तेल है। अगर सदन में उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह आग लगा लेंगी।

नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम की बैठक में उस समय सभी हैरान हो गए तब आम आदमी पार्टी (आप) की पार्षद गुड्डी देवी महापौर के समक्ष एक लीटर पानी के लिए उपयोग होनी वाली प्लास्टिक की बोतल लेकर पहुंच गई। पार्षद का दावा था कि बोतल में मिट्टी के तेल (केरोसीन) का तेल है। पार्षद ने महापौर को यह भी चेतावनी दी कि वह इस केरोसीन से सभी के सामने आत्मदाह कर लेगी। महापौर ने विपक्षी सदस्यों की मदद से गुड्डी देवी से केरोसीन भरी बोतल लेने के निर्देश दिए तब जाकर मामला शांत हुआ।

गुड्डी देवी का आरोप है कि उनके वार्ड से सफाई कर्मचारियों को बिना उनकी जानकारी के हटा लिया जा रहा है। जिसकी वजह से वह परेशान हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह उन्होंने सदन में आत्मदाह की कोशिश की है अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो महापौर और निगमायुक्त के दफ्तर के बार फिर से वह यही कार्य करेगी। हालांकि महापौर जय प्रकाश ने पार्षद के इस तरह के कदमों को अनुशासनहीनता करार दिया है। वहीं, भाजपा के पार्षदों ने इसे सदन के सदस्यों की सुरक्षा कोे भी खतरा बताया है।

मल्कागंज से पार्षद गुड्डी देवी का आरोप है कि उनके क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की भारी कमी है और लगातार उनके वार्ड से कर्मचारी हटाए जा रहे हैं। इस पर महापौर ने सफाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन-जिन वार्डों में कर्मचारियों की कमी है वहां पर यह कमी पूरी की जाए।

पहले भी हो चुकी है सदन में ऐसी घटनाएं...

पार्षद द्वारा केरोसीन की बोतल लेकर सदन की बैठक के बीच आत्मदाह की कोशिश ने सदन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे तो कोई भी सदस्य इस तरह की घटना को अंजाम दे सकता है। इससे अधिकारियों और सदन के सदस्यों की जान खतरें में पड़ सकती है।हालांकि यह पहली बार नहीं है कि सदन या स्थायी समिति की बैठक में किसी सदस्य ने इस तरह की हरकत की हो। इससे पहले भी कई बार देखने में आया है कि राजनीतिक दलों से जुड़े पर्चे और पोस्टर लेकर सदस्य सदन में बैठ जाते हैं। सदन की कार्रवाई के बीच पर्चे भी उछाले जाते हैं और पोस्टर भी लहराए जाते हैं।

इसकी बड़ी वजह से सदन में बैठक से पूर्व किसी भी सदस्य की जांच नहीं होती है। एकीकृत निगम के समय तो कांग्रेस एक पार्षद गाय का बछड़ा लेकर सदन में पहुंच गए थे। इतना ही कई पार्षदों ने निगम कार्यालयों की छतों पर चढ़कर आत्मदाह की धमकिया दी है।