अशोक भट्टाचार्य बोले-त्रिशंकु विधानसभा हुई तो BJP की गोद में जा बैठेगी TMC

 

त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी तो तृणमूल कांग्रेस भाजपा के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना लेगी।

अगर त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी तो तृणमूल कांग्रेस भाजपा के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना लेगी। उनसे विभिन्न मसलों पर सिलीगुड़ी में हमारे संवाददाता अशोक झा ने बात की। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश

सिलीगुड़ी, बंगाल में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का चर्चित चेहरा हैं अशोक नारायण भट्टाचार्य। पूर्व शहरी विकास मंत्री, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी में राज्य कमेटी के वरिष्ठ सदस्य तथा निवर्तमान सिलीगुड़ी के विधायक फिर एक बार अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। भट्टाचार्य का स्पष्ट मानना है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार जा रही है। वह अपने गठबंधन की सरकार आने का दावा भी कर रहे, लेकिन यह भी आशंका जाहिर करते हैं कि अगर त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी तो तृणमूल कांग्रेस भाजपा के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना लेगी। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश :

बंगाल में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का चर्चित चेहरा हैं अशोक नारायण भट्टाचार्य। 

क्या 2021 के चुनाव में ममता अपनी सत्ता बचा पाएंगी?

-मैं अनुभव के आधार पर स्पष्ट रूप से कह सकता हूं कि ममता बनर्जी की सरकार जाने वाली है। बंगाल की जनता जब असंतुष्ट हुई तो वाममोर्चा की 34 वर्षो की सरकार को उखाड़ फेंका। वहीं, पिछले 10 वर्षो के तृणमूल कांग्रेस के शासन से भी जनता आजिज आ चुकी है। सरकारी योजनाओं में लूटपाट हो रही, जात-पात व तुष्टीकरण की नीति वाली सरकार से जनता मुक्ति चाहती है।

तो क्या बंगाल में भाजपा की सरकार आएगी?

-नहीं, नहीं। परिवर्तन का मतलब भाजपा का सत्ता में आना थोड़े ही है। मैंने पहले ही कहा कि बंगाल की जनता सांप्रदायिकता और जात-पात की लड़ाई से खुद को असहज पा रही है। भाजपा धर्म और सांप्रदायिकता के आधार पर सत्ता पाना चाहती है, उसका यह सपना कभी भी पूरा नहीं होगा। इसीलिए दोनों के विकल्प के तौर पर जनता संयुक्त मोर्चा (वामदल, कांग्रेस व आइएसएफ) को ही चुनेगी।

आप सांप्रदायिकता और तुष्टीकरण की बात करते हैं और आपकी पार्टी सांप्रदायिक ताकतों से गठबंधन करती है, आखिर क्यों?

-आप का मतलब इंडियन सेकुलर फ्रंट (आइएसएफ) के मौलाना अब्बास सिद्दीकी से तो नहीं है? अगर हां, तो बता दें कि वह एक धार्मिक नेता हैं ना कि कट्टरपंथी और सांप्रदायिक सोच वाले व्यक्ति। उन्होंने अपने 10 से ज्यादा ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जो हिंदू और आदिवासी हैं, वह भी विभिन्न जातियों के।

ममता बनर्जी ने तो आह्वान किया है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखना है तो वामपंथी और कांग्रेस को तृणमूल का साथ देना चाहिए। इस पर आप क्या कहेंगे?

-बंगाल की जनता अच्छी तरह जानती है कि वर्ष 1998 से ही ममता बनर्जी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का हिस्सा रही हैं। उसी की अंगुली पकड़कर भाजपा ने बंगाल में अपने पांव फैलाए। तृणमूल कांग्रेस से बाहर निकले लोग अब खुलकर यह कहने लगे हैं कि भाजपा और आरएसएस की मदद से ही कम्युनिस्ट पार्टी को तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता से हटाया था। ऐसे में बंगाल की जनता कभी यह विश्वास नहीं कर सकती कि तृणमूल बंगाल में भाजपा को सत्ता में आने से रोक सकती है। अगर त्रिशंकु विधानसभा हुई तो हो ना हो तृणमूल कांग्रेस भाजपा की गोद में जा बैठेगी। हम मतदाताओं को इसे लकर आगाह कर भी रहे हैं।

वामो शासन में ट्रेड यूनियन का आतंक था, जिसे टीएमसी ने खत्म किया है, क्या यह सच है?

-सरकार और प्रतिष्ठान के बीच का एक सशक्त माध्यम ट्रेड यूनियन है। इसके नाम पर आतंक कभी भी वाममोर्चा के शासनकाल में नहीं रहा। यह अलग बात है कि पिछले 10 वर्षो में सिंडीकेट माफिया, भू माफिया और ट्रेड यूनियन के नाम पर सरकारी अधिकारियों का अपराधीकरण हुआ है। इसकी बानगी पिछले माह ही देखने को मिली। कट मनी, तोलाबाजी और वसूली के धंधेबाजों से सरकार की मिलीभगत होने के आरोप लगते रहे हैं।

संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी तो क्या आप उसके मुख्यमंत्री होंगे?

-हंसते हुए, हमारी पार्टी कैडर आधारित है। यहां जो भी फैसले होते हैं नीतिगत तरीके से लिए जाते हैं। पार्टी में कोई नेता नहीं, सभी कैडर होते हैं। यही कारण था कि कामरेड ज्योति बसु का चयन जब देश के प्रधानमंत्री पद के लिए हुआ और पार्टी ने मना कर दिया तो उन्होंने प्रधानमंत्री पद को ठुकरा दिया था। इसलिए हमारी पार्टी में कौन क्या बनेगा यह कोई नेता नहीं सोचता है। दो मई को चुनाव नतीजे सामने आने के बाद मुङो जो जिम्मेदारी दी जाएगी, मैं उसका भरपूर निर्वहन करूंगा।