सरकारी नौकरी लगवाने का लालच देने वालों से सावधान!, कई युवकों से ठग लिए दो करोड़ से ज्यादा रुपये

ठग सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

क्राइम ब्रांच के एडिशनल सीपी शिबेश सिंह ने बताया कि पुलिस को सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी की शिकायत मिली थी। मुकदमा दर्ज कर एसीपी राजेश कुमार और इंस्पेक्टर लोकेंद्र चौहान की टीम ने मामले की छानबीन की।

नई दिल्ली,  दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी बैंक और रेलवे में नौकरी का झांसा दे युवकों ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपित कोचिंग सेंटर और प्लेसमेंट सर्विस चलाते हैं। पंजाब के मोहाली निवासी संदीप सूद, वहीं के अशोक, उत्तर प्रदेश (यूपी) लखनऊ निवासी मुदासिर हबीब और लखनऊ के ही सौरभ शुक्ला ने करीब एक सौ युवकों से दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर रखी है। सौरव शुक्ला मैकेनिकल इंजीनियर है। ठग सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। बाद में रुपये लेकर बेरोजगारों का फर्जी इंटरव्यू कराया जाता था और उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र भी दे देते थे।

क्राइम ब्रांच के एडिशनल सीपी शिबेश सिंह ने बताया कि पुलिस को सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी की शिकायत मिली थी। मुकदमा दर्ज कर एसीपी राजेश कुमार और इंस्पेक्टर लोकेंद्र चौहान की टीम ने मामले की छानबीन की। पुलिस ने आरोपितों को दबोचने के लिए ढाई महीने तक लखनऊ, मोहाली, जयपुर, हमीरपुर और रतलाम इत्यादि जगहों पर छापमारी की। बाद में मुदस्सिर हबीब, सौरभ शुक्ला, संदीप सूद और अशोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से वारदात में प्रयुक्त लैपटाप, प्रिंटर, मोबाइल फोन व युवकों के कई आवेदन पत्र बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपितों ने पूरे उत्तर भारत में ठगी का जाल फैलाया हुआ था।

गिरोह का सरगना अशोक मोहाली और हिमाचल प्रदेश के कई शहर में कोचिंग सेंटर खोल रखा था। कोचिंग में आने वाले सरकारी नौकरी के इच्छुक युवकों को वह फंसाता था। वहीं, गिरोह के अन्य सदस्यों ने भी हिमाचल प्रदेश के अलावा, मोहाली, लखनऊ, रतलाम इत्यादि स्थानों पर प्लेसमेंट सेंटर चलाते थे। ठग युवकों को बताते थे कि पीछे के रास्ते से रेलवे और सरकारी बैंकों में नियुक्ति हो रही है। जिससे पीड़ित ठग के झांसे में आ जाते थे। रुपये लेने के बाद ठग गिरोह युवकों का दिल्ली, पटना और देश के अन्य शहरों में फर्जी साक्षात्कार लेकर उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र सौंप देता था। आरोपित दस हजार से 25 हजार रुपये लोगों से वसूलते थे। कम रकम होने के कारण लोग उनकी जाल में आसानी से फंस जाते थे। चूंकि ठगी की रकम कम होती थी इसलिए ज्यादातर पीड़ित इसकी शिकायत पुलिस में नहीं करते थे।