खड़गपुर सदर विधानसभा, बंगाल का रण- मिनी इंडिया में एबार दारुन होबे खेला

 

खड़गपुर सदर विधानसभा, यहां दिखती है सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक

यहां दिखती है सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक देश के हर प्रांत के लोग यहां अच्छी-खासी तादाद में हैं बसे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष हैं इलाके के सांसद पहली बार इन्होंने ही 2016 विधानसभा चुनाव में खिलाया था कमल

खड़गपुर। बोंधु एबार खेला होबे..., खेला, खेला, खेला होबे...। तृणमूल नेता देवाशीष भट्टाचार्य का यह गीत बंगाल के रण में खूब चल रहा है। पश्चिमी मेदिनीपुर जिला के प्रमुख शहर खड़गपुर में भी खेला दारुन होबे... हर जुबां का तकिया कलाम बन गया है। वैसे तो यह स्लोगन दीदी अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों में जोश भरने के लिए हर मंच पर इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन उनके मुख्य विरोधी दल भाजपा से जुड़े लोग भी इसे चुनावी दंगल में खेला (गेम) को अपने पक्ष में होने का दावा करते हैं।

खड़गपुर सदर में 1 अप्रैल को वोट पड़ने है। शहर की बात करें तो लोग इसे मिनी इंडिया भी कहते हैं। कहते हैं यहां देश का शायद ही ऐसा कोई प्रांत होगा, जहां के लोग अच्छी-खासी तादाद में यहां की मिट्टी में रचे-बसे ना हों। भाषायी एवं सांस्कृतिक विविधताओं वाले इस शहर में चुनावी रंग फागुन की तरह परवान चढ़ रहा है। हर जुबां पर केवल और केवल चुनावी चर्चा। लेकिन सबसे खास बात है कि चर्चा में कहीं भी तकरार नहीं, विवाद नहीं, बल्कि रस है। नशा भी ऐसा है, कि एकबार शुरू हो जाए तो घंटों चलती रहती है।

यहां का व्यापारी समुदाय दलगत आधार पर अलग-अलग बंटे जरूर हैं, लेकिन सामाजिक मुद्दों पर एक-दूसरे से काफी करीब है। आलोचना-समालोचना स्वस्थ होती है। यहां के प्रसिद्ध गोल मार्केट में आरएसएस के अभिमन्यु गुप्ता, पंकज रावल, सीपीएम के सुधाकर राव, तृणमूल के मोइन खान चुनावी चर्चा करते हुए एक-दूसरे की मीनमेख निकालते हैं, लेकिन खासियत भी गिनाते हैं। पुरी के प्रसिद्ध जनन्नाथ मंदिर की शक्ल लिए भी एक विशाल जगन्नाथ मंदिर है। दूसरी तरफ अयोध्या की तरह राम मंदिर है।

वहीं माता दुर्गा का मंदिर, साईं मंदिर, हनुमान मंदिर और दर्जनों शिव मंदिर है। इसी तरह मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च भी कई हैं। शहर में चार मुख्य बाजार है, जहां बांग्ला भाषियों से अधिक संख्या में गैर बांग्लाभाषियों की तादाद है। इनमें उड़िया, तेलगु, तमिल, तमिल, गुजराती, पंजाबी, मारवाड़ी, जैन, मराठी, मुस्लिम, सिख, इसाई, आदिवासी के अलावा बड़ी तादाद में पूर्वांचल के लोग है। इनके तीज-त्योहारों के दौरान यहां सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक दिखाई देती है। वहीं पूरे खड़गपुर सदर विधानसभा की बात करें तो एक तिहाई आबादी गैर बांग्लाभाषियों की है, जो यहां की राजनीति को सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हैं। बताया जाता है कि इसके पीछे कारण यहां का महत्वपूर्ण खड़गपुर रेलवे डिविजन है। पूर्व में यहां रेलकर्मियों की तादाद भारी हुआ करती थी। जो देश के विभिन्न प्रांतों से आकर यहां की मिलीजूली संस्कृति में रचते-बसते चले गए।

राजनीति में गैर बांग्लाभाषियों का रहा दबदबा

वर्तमान में भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष इलाके (पश्चिमी मेदिनीपुर) के सांसद हैं। सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार भी बताए जाते हैं। खड़गपुर का शहरी इलाका वर्ष 1969 से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। जब पूरा पश्चिम बंगाल वाममोर्चा गढ़ रहा तब भी यहां कांग्रेस का खूंटा नहीं हिला। 2016 के विधानसभा चुनाव में 1969 से लगातार विधायक रहे (1977 से 1980 की अवधि छोड़कर) कांग्रेस के ज्ञान सिंह सोहन पाल (पंजाबी बिरादरी) को हराकर दिलीप विधायक बने थे।

भाजपा के एकमात्र विधायक होने के कारण पार्टी ने भरोसा जताया और 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी मेदिनीपुर इलाके से इन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में पश्चिम बंगाल में चले भगवा लहर में ये संसद पहुंच गए। क्षेत्र का विधायक सांसद बन गए तो डेढ़ पूर्व यहां विधानसभा के उपचुनाव हुए। इसमें तृणमूल के प्रदीप सरकार ने यह सीट भाजपा से छीन ली। इसबार भाजपा ने खड़गपुर सदर से टॉलीवुड (पश्चिम बंगाल फिल्म जगत) के स्टार हिरणम्य चट्टोपाध्याय को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। हिरणम्य खड़गपुर से बाहर के हैं और क्षेत्र के लिए नए चेहरे हैं। वहीं तृणमूल ने वर्तमान विधायक प्रदीप सरकार पर ही भरोसा जताया है। जबकि वाम-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी रीता शर्मा (कांग्रेस) बनाई गईं हैं। रीता शहर के वार्ड नंबर 14 की काउंसिलर हैं। बरहाल यहां नामांकन का दौर चल रहा है। कुछ दिनों में मुकाबले की तस्वीर साफ होगी।