यौन उत्पीड़न के आरोपितों पर डीयू कार्यकारी परिषद ने की कार्रवाई

 

तीन पूर्व छात्रों और एक तकनीकी सहायक को पांच साल के लिए काली सूची में डाला।

प्रतिवादी तीनों पूर्व छात्र और शिकायतकर्ता पूर्व छात्राएं एमए सोशल वर्क विभाग के ही हैं। जबकि तकनीकी सहायक डीयू के शिक्षा विभाग का है। छात्रों और तकनीकी सहायक को पांच साल के लिए काली सूची में डाला गया है।

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की कार्यकारी परिषद ने विश्वविद्यालय के तीन पूर्व छात्रों और एक तकनीकी सहायक के खिलाफ पूर्व छात्राओं द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत के मामले में कार्रवाई की है। परिषद ने यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा फरवरी में हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में की गईं सिफारिशों के आधार पर की है। इनमें एक छात्र के खिलाफ छह छात्राओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दी थी। जबकि अन्य दो के खिलाफ एक-एक छात्रा ने। वहीं, तकनीकी सहायक के खिलाफ भी एक छात्रा ने शिकायत दी थी।

पांच साल तक डीयू में नौकरी और चरित्र प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा

प्रतिवादी तीनों पूर्व छात्र और शिकायतकर्ता पूर्व छात्राएं एमए सोशल वर्क विभाग के ही हैं। जबकि तकनीकी सहायक डीयू के शिक्षा विभाग का है। हालांकि वर्तमान में इनमें से कोई डीयू में कोई डीयू से जुडा़ नहीं है। परिषद ने आरोपित छात्रों और तकनीकी सहायक को पांच साल के लिए काली सूची में डाल दिया है। इनको पांच साल तक अब विश्वविद्यालय में कोई नौकरी नहीं मिलेगी।

विश्वविद्यालय द्वारा कोई चरित्र प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया जाएगा

इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा कोई चरित्र प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने तकनीकी सहायक के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की है। वहीं, यौन उत्पीड़न के आरोपित अन्य तीन प्रोफेसर और एक एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

समिति जांच के बाद कार्यकारी परिषद की बैठक में रिपोर्ट सौंपेगी

यह समिति जांच के बाद कार्यकारी परिषद की बैठक में रिपोर्ट सौंपेगी। समिति की चेयरमैन विश्वविद्यालय की प्राक्टर प्रोफेसर नीता सहगल और दो अन्य सदस्य प्रोफेसर रेनू देशवाल और प्रोफेसर नमिता रंगनाथन को नियुक्त किया गया है।