इस एक मामले में चीन से बस एक पायदान नीचे है भारत, बराबरी के लिए लगाना होगा पूरा जोर

 

पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है भारत

पवन ऊर्जा के मामले में प्रशांत एशिया क्षेत्र ने काफी तरक्‍की की है। इस मामले में जहां चीन सबसे आगे है वहीं भारत दूसरे नंबर पर है। इसके बाद आस्‍ट्रेलिया समेत अन्‍य देश हैं। इस पूरे क्षेत्र ने बीते वर्ष इस मामले में रिकॉर्ड कायम किया है।

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। भारत ने बीते कुछ वर्षों में वैकल्पिक ऊर्जा के माध्‍यमों को बढ़ाने में काफी पहल की है। यही वजह है कि आज प्रशांत एशिया क्षेत्र में भारत पवन ऊर्जा या विंड एनर्जी के मामले में चीन के बाद दूसरे स्‍थान पर है। ग्‍लोबल विंड एनर्जी काउंसिल द्वारा जारी की गई ताजा रिपोर्ट में ये जानकारी निकलकर सामने आई है। जीडब्‍ल्‍यूईसी की ये रिपोर्ट इस बात का भी सुबूत है कि भारत तेजी के साथ क्‍लाइमेट चेंज के मामले पर काम कर रहा है।

आपको बता दें कि क्‍लाइमेट चेंज के तय लक्ष्‍यों पर काम करने के मामले में भारत पहले ही नंबर वन पर है। यूएन की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा पहले ही किया जा चुका है कि इस मुद्दे और पेरिस समझौते के तय लक्ष्‍यों को पूरा करने की तरफ भारत तेजी से बढ़ रहा है और अन्‍य देश इससे कहीं पीछे हैं।

ग्‍लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (जीडब्‍ल्‍यूईसी ) की रिपोर्ट की ही बात करें तो वर्ष 2020 में प्रशांत एशिया क्षेत्र में कुल 55564 मेगावाट न्‍यू विंड पावर केपेबिलिटी स्‍थापित की गई, जिसमें भारत ने 1119 मेगावाट की क्षमता स्‍थापित की। इसके अलावा आस्‍ट्रेलिया ने 1097 मेगावाट, जापान ने 449 मेगावाट, कजाकिस्‍तान ने 300 मेगावाट, श्रीलंका ने 88 मेगावाट क्षमता स्‍थापित की है। हालांकि रिपोर्ट की मानें तो चीन इस मामले में काफी आगे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे क्षेत्र में चीन ने अकेले ही 52 हजार मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्‍थापित की है। इस लिहाज से चीन का इस पूरे क्षेत्र में इस मामले में दबदबा बना हुआ है। हालांकि भारत ने जिस रफ्तार के साथ इस पर काम करना शुरू किया है और संभावना तलाश रहा है, उस हिसाब से ये कहना गलत नहीं होगा कि भारत कुछ समय बाद चीन की बराबरी इस मामले में कर सकता है।

जीडब्‍ल्‍यूईसी की रिपोर्ट ये भी बताती है कि चीन ने वर्ष 2020 में वर्ष 2019 की अपेक्षा दोगुनी क्षमता इसमें हासिल की है। इतिहास पर यदि नजर डालेंगे तो इतनी तेजी से इस क्षेत्र में कहीं भी काम नहीं हुआ है। वहीं भारत की बात करें भारत ने जितनी क्षमता वर्ष 2020 में स्‍थापित की उससे अधिक वर्ष 2004 में स्‍थापित की गई थी। पूरे विश्‍व की बात करें तेा प्रशांत एशिया क्षेत्र ने बीते वर्ष 56 गीगावाट पवन ऊर्जा स्‍थापित कर एक नया कीर्तिमान स्‍थापित किया है। ये वर्ष 2019 में विश्‍व में स्‍थापित कुल ऊर्जा क्षमता के बराबर है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में प्रशांत एशिया क्षेत्र ने वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में 78 फीसद की तेजी दिखाई है। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र में कुल पवन ऊर्जा की उत्‍पादन क्षमता करीब 347 गीगावाट तक हो गई है। रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि इसकी वजह से हर वर्ष करीब 51 करोड़ टन कार्बन उत्‍सर्जन में कमी आएगी। जीडब्‍ल्‍यूईसी के सट्रेटेजी हैड फेंग ज्‍हाओ का कहना है कि प्रशांत एशिया क्षेत्र इस दिशा में सबसे तेजी से काम करने वाला क्षेत्र है। उनके मुताबिक वर्ष 2020 में तय लक्ष्‍य से करीब 60 फीसद से अधिक क्षमता को स्‍थापित किया गया है। संस्‍था के