कतर की महिलाओं को हर मोड़ पर भारी पड़ता है गार्जियनशिप नियम

 


कतर में गार्जियनशिप नियम है बड़ा सख्‍त

कतर की महिलाओं के लिए सरकार ने कई अजीब नियम बनाए हुए हैं। इसको लेकर ह्यूमन राइट्स वाच की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें इन अजीबोगरीब नियमों की कड़ी आलोचना की गई है। हालांकि कतर की सरकार इस रिपोर्ट को गलत बता रही है।

नई दिल्‍ली (एएफपी)। ह्यूमन राइट्स वॉच ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें उन देशों की कड़ी निंदा की गई है जो महिलाओं के लिए भेदभाव वाले नियम बनाते हैं और इनका पालन करवाने के लिए दबाव भी बनाते हैं। इसके लिए संगठन ने कतर की तीखे स्‍वर में निंदा की है। आपको बता दें कि कतर में महिलाओं को अकेले विदेश यात्रा करने और गर्भनिरोधक दवाओं के सेवन के लिए गार्जियन के रूप में पुरुष की इजाजत लेनी जरूरी है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां पर आज भी महिलाओं को अपनी हर छोटी बड़ी जरूरतों के लिए पुरुषों की सहमति और इजाजत की जरूरत होती है। वे स्‍वतंत्र रूप से कुछ नहीं कर सकती हैं। इस रिपोर्ट में इन नियमों में सुधार की मांग की गई है। इसमें कहा है कि एक तरफ जहां देश तरक्‍की कर रहा है वहीं दूसरी तरफ महिलाएं हर मोड़ पर अपन साथ भेदभाव होता देखती हैं। इस रिपोर्ट को Everything I Have to Do is Tied to a Man’: Women and Qatar’s Male Guardianship Rules,” नाम से संगठन की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है।

इस रिपोर्ट में कतर में जारी गार्जियनशिप नियम की आलोचना की है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां पर महिलाओं की उम्र के हिसाब से नियम भी अलग-अलग हैं। जैसे युवा महिलाओं को यात्रा पर जाने, शिक्षा के लिए, विदेश यात्रा के लिए, गर्भनिरोधक गोलियां लेने के लिए गार्जियन की इजाजत लेनी जरूरी होती है। एएफपी ने सरकारी नुमाइंदों के हवाले से बताया है कि कतर में इस तरह के नियमों की मनमाने तरीके से व्‍याख्‍या की जाती है। कुछ मामलों में इसकी शिकायत को लेकर कुछ महिलाएं कोर्ट तक जा पहुंची हैं। कतर में गार्जियन का अर्थ पिता, पति, भाई, चचेरे भाई से होता है। कतर में महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव इतना अधिक है कि यहां पर पति की मौत के बाद भी किसी महिला को उसके बच्‍चों का गार्जियन कहलाने का हक नहीं मिलता है। शादी से पहले किसी महिला का गार्जियन उसके पिता या भाई को माना जाता है शादी के बाद महिला का पति गार्जियन होता है। नहीं माना जाता है।

कतर सरकार के कम्युनिकेशन ऑफिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि कतर महिला अधिकारों का प्रखर समर्थक है। कतर न केवल अपने देश की महिलाओं के लिए ऐसा सोचता है बल्कि देश के बाहर मौजूद महिलाओं के लिए भी उसकी यही सोच है। इस बयान में कहा गया है कि लैंगिक बराबरी और महिला सशक्तिकरण खाड़ी देशों की सफलता का केंद्र बिंदु है। कतर की सरकार ने ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट को गलत बताया है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस रिपोर्ट में कतर में महिलाओं के लिए बनाए गए नियतों, नीतियों और प्रथाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि कतर की महिलाओं ने पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर गार्जियनशिप नियम के खिलाफ एक ऑनलाइन अभियान भी चलाया था। संगठन की रिपोर्ट में एक कतर की महिला के हवाले से लिखा गया है कि कतरी महिलाएं हमेशा से ही क्‍वारंटीन होती आई हैं। यही यहां की महिलाओं की जिंदगी है, जिसे अब दुनिया भी जान रही है। एक अन्‍य महिला के मुताबिक वो पढ़ना चाहती थी लेकिन उसके पेरेंट्स इसके लिए तैयार नहीं थे। ये सब तब था जब उसको पढ़ाई के लिए स्‍कॉलरशिप तक मिली थी। हालांकि एएफपी ने रिपोर्ट में शामिल इस बयान की पुष्टि नहीं की है।

94 पन्‍नों की इस रिपोर्ट में कतर के 27 कानूनों, नियमों का विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट संगठन की तरफ से 73 महिलाओं के इंटरव्यू किए। इनमें 50 महिलाएं वो थीं जिनको गार्जियनशिप नियम की वजह से आगे पढ़ाई करने से रोक दिया गया या विदेश जाने से रोका गया। हालांकि कतर ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है लेकिन कतर के आंतरिक मामलों के मंत्रालय से जारी हुए नियमों में ये भी शामिल है कि 25 वर्ष से कम की कोई गैरशादीशुदा महिला बिना गार्जियन की इजाजत के देश के बाहर नहीं जा सकती है।