पूर्व एमएलसी सुरेंद्र चौधरी का पीडीडी से इस्तीफा, बोले- पीडीपी अब भू-माफिया और घोटालेबाजों की पार्टी बनी

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के बागी महासचिव सुरेंद्र चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को गुडबॅाय कह दी है।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के बागी महासचिव सुरेंद्र चौधरी ने भी मंगलवार को औपचारिक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफती को गुडबॅाय कह दी है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफे का एलान करते हुए कहा कि पीडीपी अब आम लोगों की पार्टी नहीं रह गई है

जम्मू, राज्य ब्यूरो। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के बागी महासचिव सुरेंद्र चौधरी ने भी मंगलवार को औपचारिक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को गुडबॅाय कह दी है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफे का एलान करते हुए कहा कि पीडीपी अब आम लोगों की पार्टी नहीं रह गई है, यह भू-माफिया और घाेटालेबाजाें की पार्टी बन चुकी है।उन्होंने पार्टी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती को भेजे अपने त्यागपत्र में कहा है कि वह पार्टी छोड़ने वालों को बदनाम न करें। जो भी पार्टी सेअलग हुआ है, वह उनकी नीतियों से तंग आकर ही हुअ है।

पूर्व एमएलसी सुरेंद्र चौेधरी जम्मू प्रांत में पीडीपी के वरिष्ठ नेताओं में एक गिने जाते रहे हैं। उन्होंने बीते दिनों पीडीपी की राजनीतिक सलाहकार समिति व कार्यकारिणी में कुछ लाेगों की नियुक्ति पर एतराज जताते हुए महासचिव पद व सलाहकार समिति की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

आज यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैंने अपने साथियों और समर्थकों के साथ बातचीत के बाद ही पार्टी से सभी नाते तोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि आज की पीडीपी और पूर्व मुख्यमंत्री स्व मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी में बहुत फर्क है। उन्होंने कहा कि हमने 1999 में पीडीपी का दामन पकड़ा था और मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में लाेगों की बीच जाकर इसे मजबूत बनाया। यही कारण है कि 2002 में पीडीपी ने यहां सरकार बनायी। वर्ष 2014 में भी पीडीपी सत्ता में लौटी। लोगों कीउम्मीदो को हर वक्त पूरा करने का प्रयास किया गया। पार्टी के भीतर लोकतंत्र को तरजीह देते हुए उन्हें कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया गया जो काम करते हैं।

पूर्व एमएलसी ने कहा कि पांच अगस्त 2019 के बाद कई लोग जो पीडीपी को छोेड़ चुपचाप घर में बैठ गए थे,आज फिर पार्टी में हावी हो चुके हैं। पीडीपी अध्यक्षा नें उन नेताओं व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की है जिन्हाेंने 5 अगस्त 2019 के बाद भी लोगों के बीच जाकर हर मंच पर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठायी। आज पार्टी में पदाधिकारियों की नियुक्ति उनके जनाधार या संगठन में किए गए उनके कार्य को देखकर नहीं बल्कि उनके बाहुबल और धनबल के आधार पर होती है। किसने कितनी जमीन पर कब्जा किया है, किसने घोटाला किया है, यही देखा जाता है। मैंने इस पर एतराज जताते हुए पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। मुझे उम्मीद थी कि वह जाग जाएंगी, हमसे से बात करेंगी, लेकिन उन्होंने हमारी उपेक्षा की है।

सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी को एक वर्ग विशेष की पार्टी बना दिया हैे। आज पार्टी में भू-माफिया का कब्जा है। इसलिए हमने पीडीपी से इस्तीफा दिया है। मैने अपने सभी मुद्दों का जिक्र करते हुए महबूूबा मुफ्ती को भी एक पत्र लिखा है। मैंने उनसे आग्रह किया है कि वह पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को बदनाम करें। जब भी पीडीपी से कोई नेता या कार्यकर्ता अलग होता हो तो पीडीपी अध्यक्षा व उनके खास सलाहकार कहते हैं कि सुरक्षा एजेंसियों का दबाव है, इसलिए ये लोग पार्टी छोड़ गए हैं। एेसा कुछ नहीं है, जो भी पार्टी छोड़ रहा है वह संगठन में अपनी उपेक्षा और पार्टी के मूल सिद्धांतों की उपेेक्षा से तंग होकर ही पार्टी छोड़ रहा है। किसी दूसरे दल में शामिल हाेने संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैने अभी तक कुछ तय नहीं किया है। इस बारे में काेई बात करना अभी अपरिपक्वता होगी। पहले मैं अपने साथियों संग विचार विमर्श करूंगा, उसके बाद ही इस बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा।