रेवाड़ी नगर परिषद उपप्रधान पद पर भाजपा का कब्जा, भीतरघात के बावजूद करीबी को जिताने में कामयाब हुए राव इंद्रजीत सिंह

श्याम चुघ को मिले 18 तो प्रतिद्वंदी लोकेश यादव को मिले 14 वोट

 वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने पार्षदों को बताया कि उपप्रधान जिसे बनाना है उसके नाम की पर्ची उन्होंने प्रधान को दे दी है। इसके बाद पार्षदों को उपप्रधान चुनाव की बैठक के लिए भेज दिया गया।

रेवाड़ी, संवाददाता। भीतरघात के बावजूद रेवाड़ी नगर परिषद उपप्रधान का पद भाजपा की ही झोली में आ गया है। भाजपा के उम्मीदवार श्याम चुघ को चुनाव के बाद नगर परिषद उपप्रधान चुना गया है। कुल 32 वोटों में से श्याम चुघ को 18 तो उनके प्रतिद्वंदी लोकेश यादव को 14 वोट मिले हैं। 

रेस्ट हाउस में 27 तो नप हाउस में पहुंचकर हो गए 18 वोट

नगर परिषद उपप्रधान चुनाव को लेकर लंबे समय से गहमागहमी चल रही थी। भाजपा की तरफ से शनिवार को 25 पार्षदों को भ्रमण पर ले जाया गया था। गुरुग्राम के एक पांच सितारा होटल में पार्षद ठहरे थे तथा रविवार सुबह उनको लोकनिर्माण विश्रामगृह में लाया गया। लोकनिर्माण विश्रामगृह में पार्षदों की संख्या 27 हो गई थी। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह व उपप्रधान चुनाव के लिए भाजपा की ओर से पर्यवेक्षक बनाए गए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर व भाजपा प्रदेश महामंत्री संदीप जोशी रेस्ट हाउस में पार्षदों से बातचीत के लिए पहुंचे थे। 

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बैठक के पश्चात पार्षदों को बताया कि उपप्रधान जिसे बनाना है उसके नाम की पर्ची उन्होंने प्रधान को दे दी है। इसके बाद पार्षदों को उपप्रधान चुनाव की बैठक के लिए भेज दिया गया। दोपहर 12 बजे चेयरपर्सन पूनम यादव व पार्षदगण चुनावी बैठक के लिए नगर परिषद में पहुंचे।

अतिरिक्त उपायुक्त राहुल हुड्डा बतौर रिटर्निंग अधिकारी चुनाव कराने के लिए मौजूद रहे। चुनावी बैठक में चेयरपर्सन पूनम यादव की तरफ से उपप्रधान पद के लिए श्याम चुघ के नाम का प्रस्ताव रखा गया। श्याम चुघ के विरोध में वार्ड नंबर 5 के पार्षद लोकेश यादव ने भी नामांकन कर दिया। दो प्रत्याशी होने के चलते गुप्त मतदान कराया गया। श्याम चुघ को 18 तो लोकेश यादव को 14 वोट मिले। भाजपा के साथ रेस्ट हाउस में जहां 27 पार्षद थे वहीं नप हाउस में आकर महज 18 ही रह गए। सीधे तौर पर कहा जाए तो बड़े स्तर पर भीतरघात हुआ। श्याम चुघ के नाम का पार्षदगण पहले से ही विरोध कर रहे थे। हालांकि केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह शुरू से ही श्याम चुघ पर ही अपना आशीर्वाद बनाए हुए थे। श्याम चुघ के शुरू से ही चले आ रहे विरोध का परिणाम रहा कि उपप्रधान की कुर्सी भाजपा के हाथ से निकलते-निकलते बची।