कृषि कानून विरोधी आंदोलनकारियों को झटका, भारत बंद में शामिल नहीं होंगे दिल्ली के व्यापारी


26 मार्च को भारत बंद को लेकर व्यापारियों में काफी ज्यादा भ्रम में है।
दिल्ली के एक व्यापारी नेता ने कहा कि पिछले दिनों भी आंदोलनकारियों ने भारत बंद का आह्वान किया था उस दिन दिल्ली में इसका कोई असर नहीं हुआ था और दिल्ली के तमाम बाजार और फैक्ट्रियां पुरी तरह से खुले हुए थे।

नई दिल्ली,  संवाददाता। कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे लोगों के 26 मार्च को भारत बंद के आह्वान पर दिल्ली के बाजारों के शामिल होने की उम्मीद कम ही है। क्योंकि कारोबार की हालत ठीक नहीं है। उसमें भी दिल्ली की सीमा पर चल रहे आंदोलन से भी व्यापार-उद्याेग की हालत खस्ता है। वैसे, दिल्ली के व्यापारियों में इस भारत बंद के आह्वान को लेकर दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों में भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है और व्यापारी एक दूसरे से फोन करके बात कर रहे हैं और भारत बंद को लेकर सवाल कर रहे हैं कि क्या 26 मार्च को दिल्ली के बाजार भी बंद रहेंगे?

इस मुद्दे पर व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ) के चेयरमैन बृजेश गोयल और अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में 100 से ज्यादा व्यापार संगठनों के फोन और संदेश आए हैं, सभी मार्केट संगठनों ने बताया है कि 26 मार्च को भारत बंद को लेकर व्यापारियों में काफी ज्यादा भ्रम में है। 

सीटीआइ ने एक बयान जारी करके कहा है कि अभी 26 मार्च के बंद को लेकर हमने कोई निर्णय नहीं लिया है और ना ही किसान संगठनों ने बंद को लेकर हमसे किसी तरह का संपर्क किया है। सीटीआइ के महासचिव विष्णु भार्गव और रमेश आहूजा ने बताया की अगर आंदोलनकारी संगठन 26 मार्च के भारत बंद को लेकर हमसे संपर्क करते हैं तो उस पर विचार किया जाएगा और दिल्ली के तमाम व्यापारी संगठनों की मीटिंग बुलाई जाएगी, लेकिन मौजूदा स्थिति में दिल्ली के व्यापारी किसी भी तरह के बंद के पक्ष में नहीं है क्योंकि कोरोना के कारण व्यापारियों ने काफी ज्यादा नुकसान झेला है और अब क्योंकि होली का त्यौहार निकट है तो बाजार में थोड़ा व्यापार बढ़ने की उम्मीद है, ऐसे में एक दिन का बंद काफी नुकसान पहुंचाएगा।

बता दें कि कुछ यहीं कारण रहा कि 26 फरवरी को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में हुए संशोधनों के खिलाफ कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के भारत व्यापार बंद का दिल्ली के व्यापारियों ने साथ नहीं दिया था।सीटीआइ का कहना है कि वे तीन कृषि कानून को लेकर आंदोलनकारियों की चिंताओं के साथ है और चाहते हैं कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द इसका समाधान निकाले, लेकिन दिल्ली का व्यापारी बंद को लेकर कभी भी सहज नहीं होता है इसलिए दिल्ली बंद को लेकर कोई भी निर्णय लेने से पहले दिल्ली के तमाम व्यापारी संस्थाओं को विश्वास में लेना जरूरी है।

दिल्ली के एक व्यापारी नेता ने कहा कि पिछले दिनों भी आंदोलनकारियों ने भारत बंद का आह्वान किया था उस दिन दिल्ली में इसका कोई असर नहीं हुआ था और दिल्ली के तमाम बाजार और फैक्ट्रियां पुरी तरह से खुले हुए थे।