भारत पहुंचे अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन का जोरदार स्‍वागत, रक्षा मंत्री से होगी मुलाकात, जानें एजेंडा

अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन शुक्रवार को तीन दिनों के भारत दौरे पर पहुंचे।

चीन से चल रही तनातनी के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन शुक्रवार को तीन दिनों के भारत दौरे पर पहुंचे। नई दिल्‍ली अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका जोरदार स्‍वागत हुआ। बाइडन प्रशासन के किसी मंत्री का यह पहला भारत दौरा है जिस पर दुनिया की नजरें हैं।

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। चीन से चल रही तनातनी के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन शुक्रवार को तीन दिनों के भारत दौरे पर पहुंचे। नई दिल्‍ली अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका जोरदार स्‍वागत हुआ। बाइडन प्रशासन के किसी मंत्री का यह पहला भारत दौरा है जिस पर दुनिया की नजरें हैं। वह अपनी यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे। वह एनएसए अजित डोभाल से भी मिलकर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत करने पर विचार करेंगे।  

बीते दिनों पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने अमेरिकी रक्षा मंत्री के इस दौरे को लेकर कई जानकारियां दी थीं। हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के सहायक कार्यवाहक रक्षा मंत्री डेविड एफ हेलवी ने बताया था कि ऑस्टिन अपने समकक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे और भारत अमेरिका के बीच बड़ी रक्षा साझेदारियों को मूर्त रूप देने के तौर-तरीकों पर चर्चा करेंगे। इसमें सूचनाओं का आदान प्रदान, क्षेत्रीय रक्षा समझौता, रक्षा व्यापार और नए क्षेत्रों में सहयोग भी शामिल है।

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष लॉयड जे. ऑस्टिन के बीच शनिवार को बैठक होगी। इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूती देने के तरीके, चीन के आक्रामक तेवरों के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने और अफगानिस्तान में शांति प्रकिया जैसे मसले शामिल हो सकते हैं। दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच होने वाली बातचीत में क्वाड की रूपरेखा के तहत द्विपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा होगी।  

लॉयड ऑस्टिन  अपने समकक्ष राजनाथ सिंह के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों एवं नेताओं (एनएसए आदि) के साथ चर्चा कर सकते हैं। वह भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के साथ ही स्वतंत्र, समृद्ध और खुले इंडो-पैसेफिक क्षेत्र के माले पर भी बातचीत कर सकते हैं। बैठकों के दौरान दोनों देशों के सैन्य और रक्षा प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। बाद में दोनों देशों की ओर से साझा-बयान भी जारी किए जाएंगे